Aug 23, 2026

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने राखी निर्माण से गढ़ी नई पहचान

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‘लोकल फॉर वोकल’ की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं, हस्तनिर्मित और ईको-फ्रेंडली राखियों की बाजार में बढ़ी मांग,,

 

रुद्रप्रयाग। रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही जनपद रुद्रप्रयाग की ग्रामीण महिलाओं ने स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) एवं ग्रामोत्थान (रीप) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इन दिनों आकर्षक, हस्तनिर्मित और ईको-फ्रेंडली राखियों के निर्माण में जुटी हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं हुनर को रोजगार का माध्यम बनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

 

जनपद में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही राखियां लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पारंपरिक डिजाइन के साथ ही स्थानीय संसाधनों और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से तैयार की जा रही इन राखियों को बाजार में अच्छी मांग मिल रही है। इससे महिलाओं में उत्साह के साथ-साथ स्वरोजगार के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है। इसी क्रम में हिमाद्रि महिला स्वयं सहायता समूह, जवाड़ी से जुड़ी गुड्डी देवी अपने घर पर विभिन्न डिजाइन की हस्तनिर्मित राखियां तैयार कर रही हैं। उनके द्वारा निर्मित राखियों को स्टॉल के माध्यम से तथा मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के अंतर्गत लगाए जा रहे स्टॉलों पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। गुड्डी देवी के साथ ही प्रगति स्वायत्त सहकारिता, चंद्रपुरी से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियों का निर्माण कर रही हैं।

 

महिलाओं का कहना है कि राखी निर्माण से उन्हें घर बैठे आय का अवसर मिला है। पर्व के दौरान स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों की बिक्री होने से उनकी मेहनत का सीधा लाभ उन्हें मिल रहा है। साथ ही इससे समूह की अन्य महिलाओं को भी नए रोजगार से जुड़ने की प्रेरणा मिल रही है।

स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं। राखी निर्माण इसका एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजार, मेलों, प्रदर्शनियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे ‘लोकल फॉर वोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को ग्रामीण स्तर पर मजबूती मिल रही है।

मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र रावत ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हस्तनिर्मित राखियां स्थानीय हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता का बेहतर उदाहरण हैं। ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

रुद्रप्रयाग की ग्रामीण महिलाओं का राखी निर्माण का यह प्रयास पर्व विशेष को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ ही ‘लोकल फॉर वोकल’, महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी मजबूत कर रहा है। आने वाले समय में स्वयं सहायता समूहों के इन स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होने से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की राह और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।