Aug 23, 2026

ट्राउट पालन से बलवीर सिंह राणा ने बदली तकदीर, 15 क्विंटल उत्पादन से छह लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा

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रुद्रप्रयाग। पहाड़ों में स्वरोजगार की नई राह तलाश रहे ग्रामीणों के लिए ट्राउट मछली पालन बेहतर आय का जरिया बन रहा है। जनपद रुद्रप्रयाग में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में मत्स्य विभाग की ओर से ग्रामीणों को मत्स्य पालन से जोड़ने के साथ तकनीकी प्रशिक्षण, विभागीय मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

 

इसी पहल से जुड़कर गैड़ बस्ती गांव निवासी बलवीर सिंह राणा ने ट्राउट पालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाया और इस सीजन में करीब 15 क्विंटल ट्राउट मछली का उत्पादन कर लगभग छह लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया है। बलवीर सिंह राणा ने पहाड़ी क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए ट्राउट पालन को व्यवस्थित व्यवसाय का रूप दिया। मत्स्य विभाग से मिले तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने उत्पादन, देखभाल और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित की। 

 

उन्होंने बताया कि इस सीजन में उत्पादित 15 क्विंटल ट्राउट में से आठ क्विंटल मछली भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा खरीदी गई, जबकि शेष मछली स्थानीय बाजार में अच्छे दामों पर बेची गई। ट्राउट की बाजार में अच्छी मांग होने से उन्हें उपज का बेहतर मूल्य मिला और करीब छह लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। बलवीर सिंह राणा का कहना है कि मत्स्य पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने से उन्हें गांव में ही स्वरोजगार का अवसर मिला है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों को देखते हुए उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर मत्स्य पालन ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए आय का बेहतर माध्यम बन सकता है।

 

उन्होंने मत्स्य पालन शुरू करने और इसे व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी ने बताया कि विभाग की ओर से ग्रामीणों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। जिला योजना के माध्यम से भी ग्रामीणों को मत्स्य व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पात्र लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। 

 

उन्होंने कहा कि ट्राउट पालन जैसे व्यवसायों को बढ़ावा देकर पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला सूचना अधिकारी कृपाल लाल टम्टा ने विभागीय टीम के साथ मत्स्य पालक बलवीर सिंह राणा के तालाबों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने तालाबों की स्थिति, मत्स्य पालन की व्यवस्थाओं और संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मत्स्य प्रभारी मंजू भाकुनी भी मौजूद रहीं।

 

बलवीर सिंह राणा की सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं, विभागीय मार्गदर्शन और मेहनत के साथ पहाड़ों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर गांव में ही अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है। ट्राउट पालन से छह लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर उन्होंने अन्य ग्रामीणों और युवाओं के सामने स्वरोजगार की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।