देहरादून। उत्तराखंड में जनगणना-2027 के पहले चरण की तैयारियां जोरों पर हैं। जनगणना निदेशालय ने योजना बनाई है कि सबसे पहले राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर स्वगणना (सेल्फ एनुमरेशन) कराई जाएगी। यह प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू हो जाएगी, जिससे पूरे प्रदेश में डिजिटल जनगणना की शुरुआत होगी।
जनगणना निदेशालय के अनुसार, प्रदेश में स्वगणना 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक चलेगी। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर मोबाइल नंबर से लॉगिन करके घर की जानकारी भरी जा सकती है। खास बात यह है कि स्वगणना में किसी भी प्रकार के दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है। केवल 33 सरल सवालों के जवाब देने होंगे, जो स्क्रीन पर दिखाई देंगे। सामान्य रूप से जनगणना के पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकान गणना का काम 25 अप्रैल से शुरू होगा, जो 24 मई तक चलेगा। लेकिन स्वगणना इसके 15 दिन पहले शुरू हो रही है। निदेशालय की टीम सबसे पहले राज्यपाल भवन, मुख्यमंत्री आवास और अन्य वीआईपी आवासों पर जाकर स्वगणना कराएगी। इससे पूरे अभियान को औपचारिक शुरुआत मिलेगी और आम लोगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जनगणना निदेशालय ने प्रगणकों (इन्यूमरेटर्स) की ट्रेनिंग पूरी कर ली है। 25 अप्रैल से ये प्रगणक घर-घर जाकर मकान नंबर अंकित करेंगे और अन्य जरूरी जानकारी लेंगे। अगर कोई व्यक्ति स्वगणना नहीं करता है, तो प्रगणक उसके घर आकर 33 सवाल पूछेंगे। लेकिन स्वगणना करने वालों के मामले में प्रगणक केवल वेरिफिकेशन करेंगे, जिससे नागरिकों का समय बचेगा। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल और नागरिक-अनुकूल बनाई गई है। स्वगणना का विकल्प इसलिए दिया गया है ताकि लोग अपनी सुविधा अनुसार घर बैठे जानकारी दे सकें। उत्तराखंड में बर्फीले इलाकों को ध्यान में रखते हुए दूसरे चरण (जनसंख्या गणना) की तारीख अलग रखी गई है, लेकिन पहले चरण की यह प्रक्रिया पूरे राज्य में एक साथ चलेगी। जनगणना निदेशालय ने अपील की है कि नागरिक स्वगणना को प्राथमिकता दें। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि पूरे अभियान में पारदर्शिता और सटीकता भी बढ़ेगी। यह देश की सबसे बड़ी जनगणना है, जिसमें पहली बार व्यापक डिजिटल सुविधा दी गई है। सही और समय पर जानकारी देने से राज्य और देश के विकास योजनाओं को बेहतर दिशा मिलेगी।