रिपोर्ट : लक्ष्मण सिंह नेगी
रुद्रप्रयाग/ऊखीमठ। पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में प्रतिष्ठित, विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिर भगवान तुंगनाथ के कपाट बुधवार को ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चारण और पारंपरिक विधि-विधान के बीच हुए इस कपाटोद्घाटन के अवसर पर देश के कोने-कोने से आए सैकडो श्रद्धालु मौजूद रहे। कपाट खुलने के साथ ही चंद्रशिला की तलहटी में स्थित यह पावन धाम ’बम-बम भोले’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
इस विशेष अवसर पर मुख्य मंदिर और सभी सहायक मंदिरों को लगभग आठ कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। कपाट खुलने से पूर्व प्रातः ब्रह्म बेला में चोपता स्थित भूतनाथ मंदिर में विद्वान आचार्यों द्वारा पंचांग पूजन और विशेष अनुष्ठान संपन्न किए गए, जिसमें तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया गया।
प्रातः 8 बजे भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली का भव्य श्रृंगार कर आरती उतारी गई। इसके बाद डोली ने सुरम्य बुग्यालों के बीच नृत्य करते हुए कैलाश (धाम) के लिए प्रस्थान किया। सुबह 11 बजे मंदिर पहुंचने पर डोली ने मुख्य मंदिर की तीन परिक्रमाएं कीं। ठीक 12 बजे के करीब मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर के द्वार खोल दिए गए। पहले दिन 692 से अधिक भक्तों ने स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक कर विश्व शांति की कामना की। इस अवसर पर पूर्व विधायक मनोज रावत, राज्य महिला आयोग की सदस्य दर्शनी पंवार, जिला पंचायत सदस्य प्रीति पुष्वाण, मठापति मुकेश मैठाणी और प्रबंधक प्रकाश पुरोहित सहित बड़ी संख्या में हक-हकूकधारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
भंडारों और सेवा का संगम
रुद्रप्रयाग। यात्रा के स्वागत में चोपता और भुजगली में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। दिल्ली के पंकज जिंदल और सामाजिक कार्यकर्ता नारायण दत्त जुयाल के नेतृत्व में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। मंदिर की फूलों से सजावट में देहरादून के सुरेंद्र असवाल और अगस्त्यमुनि के धीर सिंह नेगी का विशेष सहयोग रहा।
व्यापारियों और भक्तों में भारी उत्साह
रुद्रप्रयाग। तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही यात्रा पड़ावों पर रौनक लौट आई है। स्थानीय व्यापारियों में भी इस बार की यात्रा को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।