Apr 29, 2026

अब ड्रोन और कैमरों की ’नजर’ में होंगे वनाग्नि के दोषी,  वन विभाग ने कसी कमर

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रुद्रप्रयाग। बढ़ते तापमान और सूखे के कारण धधकते जंगलों को बचाने के लिए रुद्रप्रयाग वन प्रभाग ने अब ’हाई-टेक’ रणनीति अपना ली है। वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विभाग ने जंगलों की निगरानी के लिए ड्रोन और कैमरा ट्रैप का जाल बिछा दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल आग पर काबू पाना है, बल्कि जंगलों में आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी शिकंजा कसना है।
उप प्रभागीय वनाधिकारी डीएस पुंडीर ने बताया कि जिले की सभी छह वन रेंजों के संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर लिया गया है। इन इलाकों में आधुनिक उपकरणों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अक्सर कुछ लोग जानबूझकर जंगलों में आग लगा देते हैं, जिससे बेशकीमती वन संपदा और वन्यजीवों को भारी नुकसान होता है। अब ऐसे संदिग्धों की पहचान ड्रोन कैमरों से की जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जानबूझकर आग लगाने की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने अपना निगरानी तंत्र इतना मजबूत कर दिया है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मुख्यालय तक पहुँच जाएगी।
वन विभाग ने ग्रामीणों और स्थानीय जनता से गर्मी के मौसम में जंगलों के आसपास आग न जलाने, जलनशील पदार्थ या बीड़ी-सिगरेट के टुकड़े जंगल में न फेंकने, कहीं भी धुँआ या आग दिखने पर तुरंत वन विभाग के नजदीकी अधिकारी को सूचित करने की अपील की।
 

पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। हाई-टेक निगरानी से हम आग लगाने वालों तक आसानी से पहुँच सकेंगे और समय रहते बड़ी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी - डी.एस. पुंडीर, उप प्रभागीय वनाधिकारी’
 

पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा प्राथमिकता
भूगोलवेता प्रवीन रावत ने कहा कि ड्रोन तकनीक का उपयोग वनाग्नि नियंत्रण में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इससे दुर्गम पहाड़ियों पर लगी आग की सटीक लोकेशन का पता चलेगा, जिससे वन कर्मी कम समय में मौके पर पहुँच कर आग बुझा सकेंगे।