Jul 06, 2026

घने कोहरे में वासुकी ताल ट्रैक पर रास्ता भटके यात्री को एसडीआरएफ ने सकुशल बचाया, चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद सुरक्षित पहुंचाया केदारनाथ,

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रूद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के उच्च हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) ने अपनी तत्परता, साहस और पेशेवर दक्षता का परिचय देते हुए घने कोहरे के बीच रास्ता भटके एक यात्री का सफल रेस्क्यू कर उसकी जान सुरक्षित बचाई। अत्यधिक धुंध, दुर्गम पहाड़ी मार्ग और बेहद कम दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद एसडीआरएफ की टीम ने सूझबूझ और तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए यात्री को सकुशल खोज निकाला।

सोमवार को सेक्टर मजिस्ट्रेट केदारनाथ द्वारा एसडीआरएफ को सूचना दी गई कि वासुकी ताल ट्रैक पर एक यात्री घने कोहरे और खराब मौसम के कारण रास्ता भटक गया है। लगातार बढ़ रही धुंध के चलते दृश्यता लगभग समाप्त हो गई थी, जिससे यात्री के सुरक्षित लौटने की संभावना लगातार कम होती जा रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एसडीआरएफ की सहायता मांगी गई।

सूचना मिलते ही एसडीआरएफ पोस्ट श्रीकेदारनाथ से मुख्य आरक्षी शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम आवश्यक बचाव उपकरणों एवं संचार संसाधनों के साथ बिना विलंब घटनास्थल के लिए रवाना हुई। टीम ने सबसे पहले मोबाइल फोन के माध्यम से यात्री से संपर्क स्थापित किया और उससे उसकी अनुमानित लोकेशन की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद दुर्गम पहाड़ी रास्तों, फिसलन भरे ट्रैक और घने कोहरे के बीच व्यवस्थित खोज अभियान शुरू किया गया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम को कई प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। घना कोहरा, लगातार बदलता मौसम और अत्यंत कम दृश्यता के कारण आगे बढ़ना जोखिमभरा था, फिर भी एसडीआरएफ जवानों ने धैर्य, अनुभव और रणनीतिक तरीके से खोज अभियान जारी रखा।

लगातार प्रयासों के बाद एसडीआरएफ टीम ने रास्ता भटके यात्री विशाल वामन (27 वर्ष), निवासी सिरसीधार, मध्य प्रदेश को सकुशल खोज निकाला। उस समय यात्री घबराया हुआ था, लेकिन सुरक्षित था। टीम ने उसका मनोबल बढ़ाया, प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई और सुरक्षित रूप से उसे श्रीकेदारनाथ लेकर पहुंची।

श्रीकेदारनाथ पहुंचने पर यात्री की आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर उसे सेक्टर मजिस्ट्रेट के सुपुर्द किया गया। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद यात्री ने एसडीआरएफ टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खराब मौसम और घने कोहरे के कारण उसे दिशा का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लग पा रहा था। ऐसे कठिन समय में एसडीआरएफ के जवान उसके लिए देवदूत बनकर पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि चारधाम यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम पल-पल बदलता रहता है। विशेषकर वासुकी ताल जैसे ऊंचाई वाले ट्रैक पर अचानक कोहरा, वर्षा और तेज हवाएं यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। ऐसे में एसडीआरएफ की त्वरित कार्रवाई और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों की सक्रियता लगातार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

एसडीआरएफ ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम का पूर्वानुमान जानने के बाद ही ट्रैकिंग करें, निर्धारित मार्ग से न भटकें, समूह के साथ यात्रा करें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन अथवा एसडीआरएफ को सूचना दें।