प्रधान संपादक। प्रवीन रावत।।
रुद्रप्रयाग। आज के डिजिटल दौर में जहां तकनीक ने शिक्षा को आसान और सुलभ बनाया है, वहीं इसका एक नकारात्मक असर भी सामने आ रहा है। मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग के कारण छात्र धीरे-धीरे वास्तविक हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) से दूर होते जा रहे हैं। पहले जहां शिक्षा की शुरुआत कॉपी और पेन से होती थी, वहीं अब बच्चे पढ़ाई से लेकर नोट्स बनाने तक के लिए मोबाइल पर निर्भर हो गए हैं।
शिक्षकों का कहना है कि छात्रों की लिखने की क्षमता में लगातार गिरावट देखी जा रही है। स्कूलों में पहले जहां नियमित लेखन अभ्यास कराया जाता था, अब उसकी जगह डिजिटल माध्यमों ने ले ली है। इसका सीधा असर बच्चों की हैंडराइटिंग, स्पेलिंग और याददाश्त पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हस्तलेखन केवल लिखने की कला नहीं बल्कि यह मानसिक विकास, एकाग्रता और स्मरण शक्ति को भी मजबूत करता है। लेकिन मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से यह कौशल कमजोर होता जा रहा है।
स्थानीय विद्यालय के एक शिक्षक ने बताया कि मोबाइल के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चे लिखने से बचने लगे हैं। इससे उनकी हैंडराइटिंग के साथ-साथ सीखने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। हमें स्कूलों में फिर से लेखन अभ्यास को बढ़ावा देना होगा।
वहीं एक अभिभावक ने कहा ऑनलाइन पढ़ाई के बाद से बच्चों की मोबाइल पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। अब वे लिखने से ज्यादा टाइप करना पसंद करते हैं, जो चिंता का विषय है।
शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल के साथ-साथ पारंपरिक हस्तलेखन अभ्यास को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके।