पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के बीच मूलभूत सुविधाओं का अभाव, जिला पंचायत और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उठे सवाल,
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित प्रसिद्ध संगम व्यू प्वाइंट अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और अलौकिक संगम दृश्य के कारण देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। लेकिन इस खूबसूरत पर्यटन स्थल की तस्वीर का दूसरा पक्ष बेहद चिंताजनक है। यहां इन दिनों गंदगी और प्लास्टिक कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिससे न केवल पर्यटन स्थल की सुंदरता प्रभावित हो रही है बल्कि पर्यावरण और जीवनदायिनी मंदाकिनी नदी पर भी प्रदूषण का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का आरोप है कि बढ़ती पर्यटक संख्या के अनुरूप कचरा प्रबंधन और स्वच्छता की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है। व्यू प्वाइंट के आसपास जगह-जगह प्लास्टिक बोतलें, खाद्य पदार्थों के रैपर और अन्य अपशिष्ट फैले हुए हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिला पंचायत द्वारा प्लास्टिक और गीले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि खुले में पड़ा कचरा धीरे-धीरे ढलानों के रास्ते मंदाकिनी नदी तक पहुंच रहा है। इससे नदी की स्वच्छता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। वहीं आसपास के वन क्षेत्रों में उड़कर पहुंच रहा प्लास्टिक कचरा जंगलों और वन्यजीवों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।
पर्यटकों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण और लोकप्रिय पर्यटन स्थली पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन, नियमित सफाई अभियान, शौचालय तथा ठोस कचरा प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। वर्तमान हालात न केवल पर्यटन की छवि को धूमिल कर रहे हैं, बल्कि स्वच्छ और हरित उत्तराखंड के दावों पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञ देव राघवेंद्र बद्री ने मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्रकृति की इस अनमोल धरोहर और मंदाकिनी नदी को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
वहीं, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि संगम व्यू प्वाइंट के समग्र विकास के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि यहां सार्वजनिक शौचालय निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है तथा सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन की प्रस्तावित योजनाएं धरातल पर उतरकर इस पर्यटन स्थल को गंदगी से मुक्त करा पाएंगी, या फिर प्रकृति की यह खूबसूरत धरोहर कूड़े के ढेरों में अपनी पहचान खोती जाएगी?