May 13, 2026

अस्पताल बना पार्किंग अड्डा, अगस्त्यमुनि सीएचसी में एंबुलेंस तक के लिए नहीं बची जगह, अस्पताल परिसर धीरे-धीरे निजी वाहनों का “फ्री पार्किंग जोन” बनता जा रहा है,

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अगस्त्यमुनि/रूद्रप्रयाग। राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि इन दिनों अव्यवस्थित और अवैध पार्किंग की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। हालत यह हो चुकी है कि अस्पताल परिसर में बाहरी वाहनों की भरमार के चलते मरीजों, तीमारदारों और यहां तक कि एंबुलेंस के आवागमन में भी भारी दिक्कतें पैदा हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल परिसर धीरे-धीरे निजी वाहनों का “फ्री पार्किंग जोन” बनता जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई बार आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में प्रवेश करने और खड़ा होने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। इससे गंभीर मरीजों के उपचार में देरी होने का खतरा लगातार बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।

सूत्रों के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस समस्या को लेकर कई बार पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। न तो अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाया गया और न ही पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए कोई स्थायी समाधान निकाला गया।

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की सुरक्षा दीवार से सटी नगर पंचायत की पार्किंग सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद कई वाहन चालक शुल्क बचाने के लिए अस्पताल परिसर में ही वाहन खड़े कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ लोगों की सुविधा और लापरवाही का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

व्यापार मंडल अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी ने अस्पताल परिसर में बाहरी वाहनों की पार्किंग पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल को पार्किंग अड्डे में तब्दील करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जब एंबुलेंस तक को खड़े होने की जगह नहीं मिल रही, तब यह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए अस्पताल परिसर को बाहरी वाहनों से मुक्त कराने की मांग की।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई है कि अस्पताल परिसर में केवल एंबुलेंस, चिकित्सकों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े आवश्यक वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाए। साथ ही अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर स्थायी पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो भविष्य में किसी आपात स्थिति में बड़ी जनहानि से भी इनकार नहीं किया जा

सकता।