रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में छह सदस्यीय वैज्ञानिक दल कर रहा अध्ययन, भालू-गुलदार समेत पांच प्रजातियां अध्ययन के केंद्र में,
रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों की अब वैज्ञानिक पड़ताल शुरू हो गई है। संघर्ष की घटनाओं के पीछे छिपे प्राकृतिक एवं मानवीय कारणों की पहचान तथा प्रभावी रोकथाम की रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से सलीम अली पक्षिविज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केंद्र के वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों का छह सदस्यीय दल क्षेत्र में अध्ययन कर रहा है। दल का नेतृत्व डॉ. शेखोम इनोओतोम्बी कर रहे हैं।
उप वन संरक्षक विनीत कुमार के निर्देशन में शुरू हुए अध्ययन के पहले चरण में मानव-भालू संघर्ष की दृष्टि से संवेदनशील दक्षिणी जखोली क्षेत्र को शामिल किया गया है। दल ने उच्छना, पालाकुराली और त्यूंखर समेत आसपास के गांवों में पहुंचकर स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।
अध्ययन के दायरे में हिमालयी भालू, गुलदार, जंगली सुअर, बंदर और लंगूर से संबंधित मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को शामिल किया गया है। वैज्ञानिक दल वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता, मौसम, प्राकृतिक आवास, शिकार की उपलब्धता और मानवीय गतिविधियों के साथ ही ग्रामीणों के अनुभवों एवं संघर्ष की घटनाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र कर रहा है।
यह अध्ययन रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की सभी वन क्षेत्रों में किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों से जुटाई गई जानकारी और आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए प्रभावी एवं क्षेत्र-विशिष्ट रणनीति तैयार की जा सकेगी।
उप वन संरक्षक विनीत कुमार ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की बदलती परिस्थितियों को समझने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और निरंतर निगरानी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से संघर्ष के प्रमुख कारणों की पहचान करने में मदद मिलेगी और वन्यजीव संरक्षण के साथ मानव सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय लागू किए जा सकेंगे।

