May 15, 2026

कोटी-चम्बा हादसे के बाद राहत को तरस रहा राहुल का परिवार, प्रशासन पर उठे सवाल

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रूद्रप्रयाग। टिहरी जनपद के कोटी-चम्बा मोटरमार्ग पर 23 अप्रैल को हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कई परिवार उजड़ गए, लेकिन हादसे के बाद सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता ने रुद्रप्रयाग जनपद के लड़ियासू गांव निवासी राहुल के परिवार की पीड़ा और बढ़ा दी है। हादसे में जान गंवाने वाले राहुल के परिजनों को आज तक न तो मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता मिल पाई है और न ही प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आर्थिक मदद का लाभ मिला है, जबकि इसी हादसे में अन्य मृतकों के परिवारों को राहत राशि वितरित की जा चुकी है।

 

बताया जा रहा है कि राहुल अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। होटल में नौकरी कर वह वृद्ध माता-पिता, पत्नी, छह माह के मासूम बच्चे और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी संभाल रहा था। हादसे में मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है और अब परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है।

 

राहुल के माता-पिता हृदय रोग से पीड़ित हैं। बेटे की मौत के सदमे के साथ-साथ दवाइयों और रोजमर्रा के खर्चों की चिंता ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। वहीं छह महीने का मासूम बच्चा पिता के साये से हमेशा के लिए वंचित हो गया।

 

पीड़ित परिवार का हाल जानने लड़ियासू गांव पहुंचे पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं युवा नेता मोहित डिमरी ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ही हादसे में अन्य मृतकों के परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से तीन-तीन लाख रुपये की सहायता राशि दी गई, लेकिन राहुल के परिवार को अब तक कोई मदद नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

मोहित डिमरी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि भी अब तक परिवार तक नहीं पहुंची है। उन्होंने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार और अधिकारियों को तुरंत परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए।

 

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग से मुलाकात कर राहुल की पत्नी को रोजगार दिलाने और परिवार को मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री राहत कोष से सहायता दिलाने की मांग उठाई जाएगी।

 

इधर, गांव के लोगों में भी प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द आर्थिक सहायता नहीं मिली तो परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। वृद्ध माता-पिता की दवाइयों, छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई और मासूम बच्चे के भविष्य को लेकर परिवार गहरी चिंता में है।

 

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर राहुल के परिवार को राहत कब मिलेगी और प्रशासन उनकी पीड़ा को कब समझेगा।