May 15, 2026

केदारनाथ धाम में बुजुर्ग व दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी प्राथमिक दर्शन सुविधा

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले बुजुर्ग एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें बाबा केदार के दर्शन के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए प्राथमिक दर्शन व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे उन्हें सुगम, सुरक्षित और सम्मानजनक दर्शन का लाभ मिल सकेगा।

 

इन दिनों केदारनाथ धाम में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिसके चलते दर्शन के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। भीड़भाड़ के बीच बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार मिल रही शिकायतों और श्रद्धालुओं की परेशानियों को देखते हुए बीकेटीसी ने यह अहम निर्णय लिया है।

 

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के दिशा-निर्देशों पर मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ (पीसीएस) द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ धाम में आने वाले दिव्यांग और वरिष्ठ श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्शन कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इसी उद्देश्य से दोनों धामों में विशेष व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

 

मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्धारित मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन स्लॉट निर्धारित किए गए हैं। प्रत्येक स्लॉट में 50 श्रद्धालुओं को 15-15 मिनट के अंतराल में दर्शन कराए जाएंगे। प्रतिदिन कुल एक घंटे की विशेष अवधि केवल बुजुर्ग एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रहेगी।

 

उन्होंने बताया कि यह विशेष सुविधा सुबह 8:00 बजे से 8:15 बजे तक, 10:00 बजे से 10:15 बजे तक तथा शाम 3:00 बजे से 3:15 बजे और 4:45 बजे से 5:00 बजे तक उपलब्ध रहेगी। इस दौरान केवल वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

 

बीकेटीसी के अनुसार, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तथा वास्तविक रूप से दिव्यांग श्रद्धालुओं को यह सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके लिए श्रद्धालुओं को आधार कार्ड के साथ मंदिर समिति काउंटर पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। दिव्यांगता की वास्तविक स्थिति के आकलन के बाद ही प्राथमिक दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

 

मंदिर समिति ने प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड एवं हेल्प डेस्क के साथ समन्वय स्थापित कर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना शुरू कर दिया है। बीकेटीसी के इस फैसले की श्रद्धालुओं ने सराहना करते हुए इसे मानवीय और सराहनीय पहल बताया है।