मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग के लिए 31वें दिन भी आंदोलन

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क्षेत्र की उपेक्षा पर ग्रामीणों में आक्रोश, राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर की वार्ता,

ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन 31वें दिन भी मोहनखाल में जारी रहा। लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि मोटर मार्ग का निर्माण नहीं होने से क्षेत्र में तीर्थाटन, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है।

आंदोलन के 31वें दिन राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट आंदोलन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों से वार्ता की। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मोटर मार्ग निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयास का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि तुंगनाथ-कार्तिक स्वामी पर्यटन सर्किट के चहुंमुखी विकास के लिए इस मोटर मार्ग का निर्माण बेहद जरूरी है। इसके लिए संबंधित स्तर पर प्रभावी पैरवी और सामूहिक पहल की जाएगी।

आंदोलनकारियों ने कहा कि मोहनखाल-किणझाणी-चोपता मोटर मार्ग महज आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, तीर्थाटन और पर्यटन की महत्वपूर्ण कड़ी है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से सड़क की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने शासन से आश्वासनों के बजाय धरातल पर निर्माण प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांग पर ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों की मांग को जायज बताते हुए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होकर पैरवी करने की आवश्यकता जताई। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस मौके पर संघर्ष समिति अध्यक्ष राकेश नेगी, प्रधान दीपक थपलियाल, पूर्व प्रधान वासुदेव सिंह नेगी, गोविंद प्रसाद, प्रकाश लाल, हरीश नेगी, धर्मेंद्र सिंह, संजय सिंह, राकेश सिंह, ललित मोहन, महेंद्र सिंह, मनवर सिंह नेगी, अनिल सिंह राणा, जगदीश सिंह, गिरीश सिंह, बल्देव सिंह, बलवीर सिंह, अमर सिंह सहित दो दर्जन से अधिक आंदोलनकारी मौजूद रहे।