रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड ऊखीमठ अंतर्गत स्थित प्राथमिक विद्यालय परकण्डी इन दिनों गंभीर शैक्षिक संकट का सामना कर रहा है। विद्यालय में तैनात दोनों शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण पठन-पाठन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और विद्यालय लगभग बंदी की स्थिति में पहुंच गया है। एक शिक्षक जहां जनगणना ड्यूटी में तैनात हैं, वहीं दूसरी अध्यापिका सुरभि गैरोला का अटैचमेंट विकासखंड अगस्त्यमुनि किए जाने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस विद्यालय में पहले से ही केवल दो शिक्षकों के भरोसे शिक्षण कार्य संचालित हो रहा था। ऐसे में दोनों शिक्षकों की गैरमौजूदगी ने अभिभावकों की चिंता और नाराजगी को बढ़ा दिया है। छोटे-छोटे बच्चे रोज विद्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई शिक्षक मौजूद नहीं मिल रहा। इससे स्थानीय लोगों में शिक्षा विभाग के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।
आक्रोशित अभिभावकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यालय पहले ही संसाधनों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, ऊपर से शिक्षकों के अटैचमेंट और अन्य सरकारी ड्यूटियों ने बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। एक अभिभावक ने नाराजगी जताते हुए कहा, “बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, लेकिन वहां शिक्षक नहीं मिलते। आखिर हम अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएं? क्या सरकार ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई बंद करवाना चाहती है?”
मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, वहां से अटैचमेंट किए जाने चाहिए, न कि ऐसे दूरस्थ प्राथमिक विद्यालयों से जहां केवल एक-दो शिक्षक ही कार्यरत हों। उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर शिक्षण व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि अध्यापिका सुरभि गैरोला को तत्काल मूल विद्यालय परकण्डी में वापस भेजा जाए, जनगणना ड्यूटी पर गए शिक्षक के स्थान पर वैकल्पिक शिक्षक की तैनाती की जाए तथा विद्यालय में स्थायी रूप से पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले की जानकारी होने की पुष्टि करते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। यह मामला एक बार फिर उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमी, अव्यवस्थित अटैचमेंट नीति और बदहाल प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है।