दो दिनों से जल रहे जंगल, ग्रामीणों ने जान जोखिम में डाल संभाला मोर्चा, वन विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल,
खबर सार : लक्ष्मण सिंह नेगी
ऊखीमठ/रूद्रप्रयाग। तल्लानागपुर क्षेत्र की न्याय पंचायत चोपता अंतर्गत चौड़ एवं उर्खोली के घने जंगल इन दिनों भीषण वनाग्नि की चपेट में हैं। पिछले दो दिनों से धधक रही आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे लाखों रुपये की बहुमूल्य वन सम्पदा जलकर खाक हो गई है। जंगलों से उठती आग की ऊंची-ऊंची लपटें और धुएं के गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहे हैं, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
भीषण गर्मी, सूखे मौसम और तेज हवाओं ने आग को और अधिक खतरनाक बना दिया है। आग लगातार जंगलों के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेती जा रही है। चीड़, बांज, बुरांश सहित अनेक बहुमूल्य पेड़-पौधे आग की भेंट चढ़ चुके हैं, जबकि वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पहाड़ के संवेदनशील पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार आग की सूचना समय रहते वन विभाग को दे दी गई थी, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के चलते राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से शुरू नहीं हो पाया। उर्खोली के प्रधान आजाद खत्री ने बताया कि स्थानीय ग्रामीण खुद ही जंगलों में उतरकर आग बुझाने में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर लोगों ने पेड़ों की टहनियों और हरे पौधों की मदद से आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन आग की भयावहता के सामने ये प्रयास अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
ग्रामीण दिनेश सिंह नेगी ने बताया कि आग बुझाने के दौरान ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और तेज हवाओं के कारण आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उन्होंने लोगों से जंगलों के आसपास पूरी सावधानी बरतने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न करने की अपील की।
वनाग्नि की इस घटना ने एक बार फिर वन सुरक्षा व्यवस्थाओं और आग से निपटने की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने सरकार एवं वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने और वनाग्नि रोकने के लिए स्थायी एवं प्रभावी रणनीति लागू करने की मांग की है।