पर्यटन स्थल सारी-देवरियाताल में काफल फेस्टिवल का भव्य समापन, सांस्कृतिक रंगों की दिखी छटा,
रिपोर्ट : लक्ष्मण सिंह रावत
ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। पर्यटन स्थल सारी-देवरियाताल में पांडवाज ग्रुप एवं ग्राम पंचायत सारी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय द्वितीय काफल फेस्टिवल का रंगारंग कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। समापन अवसर पर आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दर्शकों ने देर शाम तक भरपूर आनंद लिया।
फेस्टिवल में सारी गांव सहित तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों के ग्रामीणों के साथ-साथ देश-विदेश से आए सैलानियों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की। आयोजन के दौरान स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे, जहां पांडवाज ग्रुप एवं महिला मंगल दल सारी ने पर्यटकों को पारंपरिक स्वाद से रूबरू कराया।
समापन अवसर पर विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया। परिचर्चा के माध्यम से पॉलीथिन उन्मूलन, ग्लोबल वार्मिंग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने पांडवाज ग्रुप की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने केदार घाटी की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि देवरियाताल और सारी गांव तेजी से पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। क्षेत्र पंचायत प्रमुख पंकज शुक्ला ने कहा कि पांडवाज ग्रुप साहित्य, संगीत और समाज के क्षेत्र में निरंतर नवाचार कर रहा है। वहीं जिला पंचायत सदस्य प्रीति पुष्वाण ने भी देवरियाताल और सारी गांव की बढ़ती लोकप्रियता को क्षेत्र के लिए सकारात्मक बताया।
पांडवाज ग्रुप के प्रभारी सलिल डोभाल ने बताया कि फेस्टिवल में सारी, तुंगनाथ घाटी, चमोली, श्रीनगर और पौड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं ने प्रतिभाग किया। इस दौरान मैराथन दौड़, रस्साकशी समेत कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। आयोजन में सहयोग करने वाले लोगों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर प्रधान अनीता देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य भरत सिंह नेगी, उपजिलाधिकारी अनिल सिंह रावत, वन पंचायत सरपंच मुरली सिंह नेगी, हिमालयन ग्रामीण संस्था के अध्यक्ष कैलाश पुष्वाण सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, पांडवाज ग्रुप के पदाधिकारी, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।