Jul 28, 2026

जुकांणी के प्राकृतिक जल स्रोत को मिला नया जीवन, ब्लॉगर आलोक राणा की पहल बनी मिसाल,

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व्यक्तिगत प्रयास और जनसहयोग से शुरू हुआ संरक्षण अभियान, क्षेत्र में हो रही सराहना,

 

रिपोर्ट : लक्ष्मण सिंह नेगी,

ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। मद्महेश्वर घाटी के युवा ब्लॉगर एवं समाजसेवी आलोक राणा ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल करते हुए ऊखीमठ–मनसूना–रासी मोटर मार्ग पर जुकांणी स्थित प्राकृतिक जल स्रोत के संरक्षण और पुनर्जीवन का जिम्मा अपने हाथों में लिया है। उनकी इस पहल को क्षेत्रभर में व्यापक सराहना मिल रही है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने इसे जल संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक कदम बताया है।

जानकारी के अनुसार, पिलोजी–गिरीया निर्माणाधीन मोटर मार्ग के निर्माण कार्य के दौरान जुकांणी का यह प्राकृतिक जल स्रोत क्षतिग्रस्त हो गया था। वर्षों से स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों की प्यास बुझाने वाला यह जल स्रोत प्रभावित होने के बाद इसके संरक्षण और पुनर्जीवन की मांग लगातार उठ रही थी।

इसी बीच गिरीया निवासी आलोक राणा ने व्यक्तिगत स्तर पर तथा अपने कुछ बाहरी सहयोगियों और फॉलोअर्स के सहयोग से जल स्रोत को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने जल स्रोत के आसपास जमा मलबा हटाने, प्राकृतिक जल प्रवाह को व्यवस्थित करने तथा स्रोत के संरक्षण के लिए आवश्यक कार्य शुरू कर दिए हैं। उनका उद्देश्य न केवल इस प्राकृतिक धारा को पुनर्जीवित करना है, बल्कि लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना है।

आलोक राणा ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों के प्राकृतिक जल स्रोत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इन्हीं स्रोतों से गांवों की पेयजल व्यवस्था संचालित होती है और स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलित रहती है। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। यदि समय रहते इनकी सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।

इस पहल की ज्येष्ठ प्रमुख राकेश नेगी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य विनोद राणा, प्रधान संगठन ब्लॉक महामंत्री मदन भट्ट, ग्राम प्रधान सरिता नेगी, बिशाम्बरी देवी, पूर्व प्रधान प्रताप सिंह राणा, बीना थपलियाल, प्रेमलता पंत तथा व्यापार संघ मनसूना के अध्यक्ष अवतार सिंह राणा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों ने मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं का पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार आगे आना समाज के लिए प्रेरणादायक है।

साथ ही उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों से सड़क निर्माण कार्यों के दौरान प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा क्षतिग्रस्त जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग भी की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जनसहभागिता से शुरू हुई यह पहल अब एक जनआंदोलन का रूप ले रही है। उनका विश्वास है कि सामूहिक सहयोग से जुकांणी का प्राकृतिक जल स्रोत पुनः अपने पुराने स्वरूप में लौट आया है और आने वाले वर्षों तक ग्रामीणों एवं राहगीरों के लिए जीवनदायिनी धारा बना रहेगा।