May 25, 2026

बाबा केदार के दरबार में रीलबाजी का अशोभनीय प्रदर्शन, कंधों पर चढ़कर बनाए जा रहे वीडियो, आस्था और मर्यादाओं पर बड़ा सवाल,

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आखिर कहां गया बीकेटीसी और प्रशासन का अनुशासन तंत्र,

रूद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध 11वें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम, जहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर अपने आराध्य बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वही पवित्र धाम अब सोशल मीडिया रीलबाजी और वायरल कंटेंट की होड़ के कारण चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।

 

बाबा केदार के दरबार से सामने आई कुछ वायरल तस्वीरों और वीडियो ने न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ युवक मंदिर परिसर के आसपास अपने साथियों के कंधों पर चढ़कर स्टंटनुमा अंदाज में रील बनाते नजर आ रहे हैं। कोई फिल्मी स्टाइल में वीडियो शूट कर रहा है, तो कोई बाबा केदार के धाम को सोशल मीडिया कंटेंट का बैकग्राउंड बनाकर लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़ में शामिल दिखाई दे रहा है।

 

धार्मिक आस्था और सनातन परंपराओं के प्रतीक माने जाने वाले केदारनाथ धाम में इस प्रकार की गतिविधियों ने श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि बाबा केदार का धाम कोई मनोरंजन स्थल, शूटिंग लोकेशन या सोशल मीडिया स्टूडियो नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां इस प्रकार की हरकतें धाम की गरिमा और धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर मंदिर परिसर में अनुशासन बनाए रखने और धार्मिक मर्यादाओं का पालन कराने के लिए बनाए गए नियम-कानून कहां गायब हो गए?

 

जब यात्रा शुरू होने से पहले प्रशासन और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से रील, डांस वीडियो, तेज संगीत और अशोभनीय गतिविधियों पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं, तो फिर इस प्रकार की घटनाएं खुलेआम कैसे हो रही हैं?

श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में हर समय पुलिस, सुरक्षा बलों और सीसीटीवी निगरानी की बात कही जाती है, लेकिन वायरल हो रहे वीडियो यह बताने के लिए काफी हैं कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन की आंखों के सामने आस्था का मजाक उड़ाया जा रहा है, या फिर ऐसी गतिविधियों को अनदेखा किया जा रहा है?

इस मामले को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी, हिमांशु तिवारी एवं गौरव तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाबा केदार धाम का मजाक बनाकर रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिस धाम में लोग श्रद्धा और भक्ति लेकर पहुंचते हैं, वहां कंधों पर चढ़कर रील बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में बीकेटीसी और प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

वहीं इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीकेटीसी सदस्य विनीत पोस्ती ने कहा कि इस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए धाम पहुंच रहे हैं और समिति लगातार श्रद्धालुओं को सुगम एवं व्यवस्थित दर्शन कराने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि भीड़ के बीच कुछ लोग कंधों पर चढ़कर रील बना रहे हैं, जो उचित नहीं है। ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

गौरतलब है कि पहले ही केदारनाथ यात्रा में भारी भीड़, वीआईपी संस्कृति, ट्रैफिक जाम, महंगाई और अव्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब धाम में वायरल हो रही रीलबाजी ने प्रशासन और बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर एक और बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिर परिसर में सोशल मीडिया रील और अशोभनीय गतिविधियों पर तत्काल सख्ती की जाए, निगरानी बढ़ाई जाए और धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि बाबा केदार धाम की पवित्रता और गरिमा बनी रह सके।

अब देखने वाली बात होगी कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन और बीकेटीसी कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाते हैं, या फिर बाबा केदार का धाम यूं ही सोशल मीडिया रील संस्कृति की अराजकता के बीच अपनी मर्यादा खोता रहेगा।