Aug 20, 2026

भारी बारिश में छेनागाड़ पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण, सरकार के वादों पर त्रिभुवन चौहान ने उठाए सवाल,

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सड़क, अधूरे रास्ते, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों ने बुलंद की आवाज, सात दिन में कार्रवाई न होने पर डीएम कार्यालय घेराव की चेतावनी,

रुद्रप्रयाग। भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद गुरुवार को छेनागाड़ में सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए। आपदा से प्रभावित परिवारों की सड़क, अधूरे रास्ते, उचित मुआवजा और स्थायी पुनर्वास सहित विभिन्न मांगों को लेकर ग्रामीणों ने अपनी आवाज बुलंद की। लगातार बारिश के बीच छाता और बरसाती लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रभावितों की समस्याओं का समाधान होने तक उनकी आवाज उठती रहेगी। कार्यक्रम में आसपास के गांवों के ग्राम प्रधानों के साथ जखोली ब्लॉक के ज्येष्ठ प्रमुख नवीन सेमवाल, ग्राम प्रधान जोला-पाठ्यूं दीपा देवी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सैकड़ों ग्रामीणों ने भी छेनागाड़ पहुंचकर प्रभावित परिवारों की मांगों को समर्थन दिया।

 

इस दौरान त्रिभुवन चौहान ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आपदा के बाद सरकार की ओर से 1200 करोड़ रुपये के बड़े-बड़े दावे और घोषणाएं की गई थीं। अब सरकार को बताना चाहिए कि इन घोषणाओं और बजट का वास्तविक लाभ प्रभावित ग्रामीणों तक कितना पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार के दावों और छेनागाड़ की जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। प्रभावित ग्रामीण आज भी सड़क और रास्ते जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भौंर गांव तक दुपहिया वाहन पहुंचाने के वादे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रामीण आज भी उस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता को भाषण और आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर सड़क और सुविधाएं चाहिए।

 

चौहान ने भाजपा सांसद अनिल बलूनी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा के समय प्रभावित क्षेत्र में आठ टेंट तक उपलब्ध नहीं कराए जा सके। ऐसे में बड़े-बड़े दावों और घोषणाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि आपदा के समय प्रभावित लोगों के साथ खड़ा होना सबसे जरूरी होता है। यदि जरूरत के समय बुनियादी राहत व्यवस्था तक नहीं हो पाती तो हजारों करोड़ रुपये के दावों पर जनता कैसे विश्वास करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत राजनीति नहीं, बल्कि आपदा प्रभावितों के अधिकार और सम्मान का सवाल है।

 

उन्होंने क्षेत्र में बन रही सिंचाई नहरों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। चौहान ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सिंचाई की वास्तविक जरूरत और उपयोगिता को नजरअंदाज कर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि क्षेत्र में चल रहे सिंचाई नहर निर्माण कार्यों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा प्रत्येक कार्य की स्वीकृति, लागत, गुणवत्ता, उपयोगिता और उससे होने वाले वास्तविक लाभ का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि जनता के पैसे से सिंचाई की नहरें बनाई जा रही हैं तो उनका लाभ किसानों के खेतों तक दिखाई देना चाहिए। केवल कागजों में काम दिखाकर सरकारी धन खर्च करने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जांच में अनियमितता, कमीशनखोरी या भ्रष्टाचार सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

 

छेनागाड़ में जुटे ग्रामीणों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर स्पष्ट किया कि प्रभावित क्षेत्रों में सड़क सुविधा उपलब्ध कराई जाए, अधूरे रास्तों का शीघ्र निर्माण पूरा किया जाए, आपदा प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और विस्थापित परिवारों का सम्मानजनक एवं स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। त्रिभुवन चौहान ने कहा कि यह केवल एक गांव की लड़ाई नहीं, बल्कि उन सभी प्रभावित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई है, जिन्होंने आपदा का दंश झेला है और आज भी उसके दुष्परिणाम भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारी बारिश भी ग्रामीणों के कदम नहीं रोक सकी, क्योंकि यह लड़ाई सड़क और रास्ते से आगे बढ़कर अधिकार, सम्मान और भविष्य की लड़ाई बन चुकी है।

 

चौहान ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिन के भीतर प्रभावित ग्रामीणों की मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो जिला अधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा और आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा, “अब आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए। हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आपदा प्रभावितों के हक की कीमत पर विकास मंजूर नहीं होगा।”