9 दिनों का इंतज़ार चीख-पुकार में बदला,
रहस्यमय तरिके से लापता मासूम पंकु का शव बरामद
प्रवीन रावत। प्रधान संपादक।।
रुद्रप्रयाग। बाडव गांव से पिछले 9 दिनों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता 4 वर्षीय मासूम पंकु की तलाश आखिरकार एक बेहद दुखद अंत पर खत्म हुई। एसडीआरएफ टीम को सघन सर्च ऑपरेशन के बाद मासूम का शव बरामद हुआ।
बता दें कि पंकु बीते दिनों अपने घर के पास से अचानक लापता हो गया था। परिजनों ने उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस और प्रशासन को सूचित किया गया। एसडीआरएफ पोस्ट रतूड़ा से ’’उप निरीक्षक आशीष डिमरी’’ के नेतृत्व में टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला। पहाड़ी क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के बावजूद, टीम ने हार नहीं मानी। ड्रोन और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से लगातार कॉम्बिंग जारी रही। रविवार को गांव से लगभग दो किलोमीटर दूर ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में टीम को मासूम का निष्प्राण शरीर मिला। टीम ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया है। पुलिस टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है ताकि मौत की गुत्थी सुलझ सके।
शोक में डूबा बाडव गांव
रुद्रप्रयाग। जैसे ही पंकु का शव गांव में लाया गया, परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। 9 दिनों तक ग्रामीण इस उम्मीद में थे कि शायद पंकु सुरक्षित मिल जाएगा, लेकिन इस बरामदगी ने उन तमाम उम्मीदों को राख कर दिया।
मां के पीछे निकला था मासूम
रुद्रप्रयाग। जानकारी के मुताबिक, बीते चार अप्रैल को मासूम के पिता विजय लाल खेत में हल चलाने गए थे। दोपहर करीब 2ः30 बजे मां मनसा देवी पति के लिए खाना लेकर खेत की ओर निकलीं। इस दौरान मासूम पंकू भी अपनी मां के पीछे-पीछे रोते हुए घर से निकल गया, लेकिन मां को इस बात की भनक तक नहीं लगी। जब मां वापस घर लौटी, तो घर के आंगन से पंकू गायब था।
खत्म हुई आसः मासूम पंकू का मिला शव
रुद्रप्रयाग। पिता विजय लाल और मां मनसा देवी इस आस में थे कि उनका लाडला कहीं सुरक्षित होगा, लेकिन बरामदगी की खबर ने सब कुछ खत्म कर दिया। घर के जिस आंगन से पंकू गायब हुआ था, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और मातम पसरा है।
मन्नतें अधूरी, सूना हूआ घर का आंगन
रुद्रप्रयाग। जिस आंगन में कुछ दिन पहले तक किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और सिसकियां हैं। मासूम की सुरक्षित वापसी के लिए परिजन और ग्रामीण पिछले कई दिनों से मंदिरों में मन्नतें मांग रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।