रूद्रप्रयाग।विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के पावन अवसर पर जहां लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन को उमड़ रहे हैं, वहीं कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा यात्रा की छवि धूमिल करने की कोशिशें भी सामने आ रही हैं। हाल ही में गुजरात से आए एक तीर्थयात्री की हार्ट अटैक से हुई मृत्यु के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और तथ्यों से परे पोस्ट वायरल की जा रही हैं, जिससे न केवल देवभूमि उत्तराखंड की छवि प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय लोगों के रोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
प्रशासन ने इस पूरे मामले में पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि श्रद्धालु की मृत्यु स्वाभाविक रूप से हार्ट अटैक के कारण हुई थी। साथ ही, शव को नीचे लाने के लिए हेली सेवा की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह झूठी अफवाह फैलाई गई कि शव को हेलीकॉप्टर से नीचे लाने के लिए 65 हजार रुपये वसूले गए।
इस संबंध में मृतक के पुत्र हेमंत भाई माली ने स्वयं सामने आकर सच्चाई स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि वे अपने 69 वर्षीय पिता दिलीप भाई मन्नू माली के साथ गुजरात से केदारनाथ यात्रा पर आए थे। यात्रा के दौरान अचानक उनके पिता की तबीयत बिगड़ी और हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया।
हेमंत माली के अनुसार, हेली सेवा उपलब्ध कराने में कुछ देरी अवश्य हुई, लेकिन इसके लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया गया। उन्होंने साफ कहा कि हेलीकॉप्टर सेवा पूरी तरह निशुल्क रही। हालांकि, एंबुलेंस के माध्यम से शव को ले जाने के लिए 53 हजार रुपये का भुगतान किया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी विशाल मिश्रा को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया है और यह स्पष्ट किया है कि हेलीकॉप्टर सेवा के लिए कोई धनराशि नहीं ली गई। सोशल मीडिया पर जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह भ्रामक और असत्य हैं।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि केदारनाथ यात्रा को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं और आमजन से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट और भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को ही मानें।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सेवाएं सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखी जा रही हैं। ऐसे में अफवाह फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
केदारनाथ धाम यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि हजारों स्थानीय लोगों की आजीविका का आधार भी है। ऐसे में भ्रामक खबरें फैलाना न केवल अनैतिक है, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कृत्य भी है। प्रशासन और जागरूक नागरिकों की जिम्मेदारी है कि ऐसे प्रयासों को समय रहते रोका जाए और सत्य को सामने लाया जाए।