Mar 14, 2026

नवरात्रि से पहले कुट्टू के आटे को लेकर एडवाइजरी जारी, सील बंद पैकेट, एक्सपायरी लिखना जरूरी

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देहरादून। चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहा है।  नवरात्र के दौरान उपवास रखने वाले व्रती कुट्टू के आटे से बने पकवानों का सेवन करते हैं. यही वजह है कि नवरात्र के दौरान कुट्टू के आटे की डिमांड काफी अधिक बढ़ जाती है। जिसके चलते कुट्टू के आटे में मिलावटखोरी के मामले भी सामने लगते हैं। पुराने कुट्टू के आटे को भी नए कुट्टू के आटे में मिलाकर बेच दिया जाता है। जिसको देखते हुए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग अलर्ट हो गया है. इसको लेकर एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है।  जिसके तहत, बाजारों में सिर्फ सील पैक कुट्टू के आटे की ही बिक्री की जाएगी। उस पर एक्सपायरी डेट लिखना अनिवार्य होगा। 

दरअसल पिछले साल चैत्र नवरात्र के दौरान मिलावटी और खराब कुट्टू का आटा खाने से देहरादून और हरिद्वार जिले के तमाम लोग बीमार पड़ गए थे। इसके बाद खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से प्रदेश भर में वृहद स्तर पर अभियान चलाया गया। उस दौरान निर्णय लिया गया था कि सिर्फ पैकेट बंद कुट्टू के आटे की ही बिक्री की जाएगी। साल 2025 में नवरात्र के दौरान देहरादून और हरिद्वार में कुट्टू का आटा खाने से करीब 300 से अधिक लोग बीमार हो गए थे. जांच में पता चला था कि कुट्टू के आटे की सप्लाई सहारनपुर से की गई थी। उस दौरान फूड इंस्पेक्टर्स ने देहरादून और हरिद्वार जिले के तमाम दुकानों में छापेमारी का सैंपल भी एकत्रित किए थे।  ऐसे में पिछले साल कुट्टू का आटा खाने से लोगों के बीमार होने का मामला सामने आने के बाद खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग अभी से ही सतर्क हो गया है।  इसके लिए एफडीए ने एतिहातन एडवाइजरी जारी कर दी है।  जारी किए गए एडवाइजरी में इस बात पर जोर दिया गया है कि खुले में कुट्टू का आटा नहीं बेचा जाएगा। पैकेट बंद कुट्टू की ही बिक्री की जाएगी। उस पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग डेट के साथ ही एक्सपायरी डेट भी लिखना अनिवार्य होगा। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एडवाइजरी जारी करने के साथ ही सभी फूड इंस्पेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वो लगातार निरीक्षण करते रहे।  इसी क्रम में फूड इंस्पेक्टर्स ने उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारी और कारोबारी के साथ बैठक कर एडवाइजरी संबंधित दिशा निर्देश दिए. बैठक के दौरान यह कहा गया कि कुट्टू आटे के निर्माता और वितरक अच्छी गुणवत्ता वाली कुट्टू गिरी का ही इस्तेमाल करें।