भक्तों की मांग – वीआईपी दर्शन व्यवस्था समाप्त कर आम श्रद्धालुओं को मिले राहत,
रूद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में आस्था का जनसैलाब लगातार उमड़ रहा है। बाबा केदार के कपाट खुलने के मात्र 22 दिनों के भीतर ही पांच लाख से अधिक श्रद्धालु धाम पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में इस बार सबसे अधिक भीड़ केदारनाथ धाम में देखने को मिल रही है। प्रतिदिन 20 से 25 हजार के बीच श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे यात्रा व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।
22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से लगातार श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं को दोपहर तक स्पर्श दर्शन और उसके बाद श्रृंगार दर्शन कराए जा रहे हैं। हालांकि बढ़ती भीड़ के साथ अब व्यवस्थाओं को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
धाम से लौटे श्रद्धालुओं ने यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है। कई यात्रियों ने पैदल यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों की अनियंत्रित आवाजाही को बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि संकरे रास्तों पर एक साथ बड़ी संख्या में घोड़े-खच्चर चलने से पैदल यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा सबसे ज्यादा नाराजगी वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर सामने आ रही है। श्रद्धालुओं का आरोप है कि आम भक्तों को 8 से 10 घंटे तक लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि पैसे देकर वीआईपी गेट से जल्द दर्शन कराए जा रहे हैं। भक्तों का कहना है कि बाबा के दरबार में आम और खास का भेद समाप्त होना चाहिए।
धाम पहुंचे श्रद्धालु कन्हैया और सूरज ने बीकेटीसी की व्यवस्थाओं पर असंतोष जताते हुए कहा कि आम श्रद्धालु पूरी रात लाइन में खड़े रहते हैं, जबकि वीआईपी व्यवस्था के जरिए कुछ लोगों को सीधे दर्शन कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रात 2 बजे लाइन में लगने के बाद उन्हें सुबह 10 बजे बाबा के दर्शन हो सके। श्रद्धालुओं ने सरकार से मांग की है कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर सख्त निर्णय लिया जाए, क्योंकि इससे धाम की छवि प्रभावित हो रही है।
वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशाल मिश्रा ने कहा कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। धाम में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है तथा यात्रा संचालन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।