चार तालाबों में कर रहे ट्राउट मछली का उत्पादन, सालाना 5 से 6 लाख रुपये की आय; स्थानीय बाजार के साथ आईटीबीपी और एसएसबी को भी कर रहे आपूर्ति
रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के गैड बस्टी निवासी विजय सिंह राणा ने ट्राउट मत्स्य पालन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर पहाड़ में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। गांव में चार तालाबों में ट्राउट मछली का पालन कर वह प्रतिवर्ष करीब पांच से छह लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। उनका यह प्रयास क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी बन रहा है।
विजय सिंह राणा द्वारा उत्पादित ट्राउट मछली की बिक्री स्थानीय बाजार के साथ ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को भी की जा रही है। इससे उन्हें गांव में ही रोजगार का अवसर मिला है और आय का स्थायी स्रोत भी तैयार हुआ है। इस वर्ष उन्होंने करीब 80 किलोग्राम ट्राउट मछली का उत्पादन कर उसे 500 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा।
विजय सिंह राणा का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध जल संसाधनों का सदुपयोग कर मत्स्य पालन को स्वरोजगार के बेहतर विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है। आधुनिक तकनीक, उचित प्रबंधन और बाजार की बेहतर व्यवस्था के साथ मत्स्य पालन से युवाओं को अच्छी आमदनी हासिल हो सकती है।
उन्होंने बताया कि मत्स्य विभाग और राज्य सरकार की ओर से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए इच्छुक लोगों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ आवश्यक सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्हें भी विभाग की ओर से मछली के बीज, चारा और टैंक निर्माण आदि के लिए सहायता मिली है।
विजय सिंह राणा की सफलता यह साबित करती है कि पहाड़ों में मौजूद प्राकृतिक जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर युवा अपने गांव में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। ट्राउट मत्स्य पालन के क्षेत्र में उनका यह प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही पलायन की चुनौती के बीच गांव में ही रोजगार की संभावनाओं को भी बढ़ावा दे रहा है।

