देहरादून। उत्तराखंड का चर्चित और हृदयविदारक अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राज्य की राजनीति और जन-मानस के केंद्र में आ गया है। अंकिता को पूर्ण न्याय दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार, 16 अक्टूबर को 'अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच' के आह्वान पर उत्तराखंड महिला मंच, भाकपा (माले), सीटू तथा विभिन्न जन-संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने देहरादून के गांधी पार्क पर जोरदार प्रदर्शन किया।
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को देहरादून में अंकिता को न्याय दिलाने की मांग के साथ विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मामले में कथित वीआईपी की भूमिका और उसे राज्यपाल नियुक्त किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए। वहीं, मसूरी में कांग्रेस ने भी प्रेस वार्ता कर सरकार से प्रकरण से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देने और कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग की। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर उत्तराखंड महिला मंच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) और जनसरोकारों से जुड़े अन्य संगठनों के लोग गांधी पार्क के द्वार पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने अंकिता के परिवार को न्याय दिलाने और मामले से जुड़े कथित वीआईपी की भूमिका स्पष्ट करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में शामिल निर्मला बिष्ट ने कहा कि 14 अक्टूबर को जब अंकिता के माता-पिता दिल्ली में इंडिया गेट के पास न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे, तब कथित वीआईपी को राज्यपाल नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई। उन्होंने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी का नाम और भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। निर्मला बिष्ट के आरोपों के मुताबिक, अंकिता भोगपुर स्थित एक रिसॉर्ट में स्वागतकर्मी के रूप में काम करती थी। यह रिसॉर्ट सत्तारूढ़ दल भाजपा से जुड़े एक प्रभावशाली नेता के बेटे का बताया गया था। उनका आरोप है कि अंकिता पर एक वीआईपी को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया गया था और इनकार करने पर रिसॉर्ट के मालिक ने अपने दो कर्मचारियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। हालांकि, कथित वीआईपी की भूमिका और नियुक्ति को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में इन दावों और जांच में स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर मसूरी में शहर कांग्रेस कमेटी ने एक होटल के सभागार में प्रेस वार्ता की। पूर्व मंडी परिषद सभापति उपेंद्र थपलियाल ने आरोप लगाया कि सरकार अंकिता को न्याय दिलाने के बजाय मामले से जुड़े सवालों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका को लेकर स्पष्ट जवाब देने तथा उसका नाम सार्वजनिक करने की मांग की। उपेंद्र थपलियाल, जसबीर कौर, अमित गुप्ता और महेश चंद ने आरोप लगाया कि अंकिता के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वहां से हटाया गया और उनके साथ उत्पीड़न किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि अंकिता के परिवार को न्याय मिलने और उठाए जा रहे सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। देहरादून और मसूरी में उठी मांगों के केंद्र में कथित वीआईपी की पहचान, उसकी भूमिका और मामले से जुड़े सवालों पर स्पष्टता है। प्रदर्शनकारियों और कांग्रेस नेताओं ने सरकार से जवाब देने की मांग की है। अब इस पूरे प्रकरण में संबंधित आरोपों पर आधिकारिक पक्ष और जांच से जुड़े प्रमाण सामने आना अहम होगा, ताकि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर मिल सके।

