राजकीय इंटर कॉलेज भीरी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आयोजित किया विधिक जागरूकता शिविर, नुक्कड़ नाटक के जरिए सामाजिक कुरीतियों पर किया प्रहार,
रुद्रप्रयाग। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के दिशा-निर्देशन में राजकीय इंटर कॉलेज भीरी में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रुद्रप्रयाग के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश के मार्गदर्शन तथा प्राधिकरण की सचिव पायल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में बालिकाओं को उनके अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा और समानता के प्रति जागरूक किया गया।
इस दौरान बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या तथा बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन पर जोर दिया गया।
शिविर को संबोधित करते हुए सचिव पायल सिंह ने बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने तथा किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तीकरण एक बेहतर एवं समानतापूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।
बाल विवाह और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने निःशुल्क विधिक सहायता के महत्व की जानकारी देते हुए जरूरतमंद एवं पात्र व्यक्तियों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध कानूनी सहायता का लाभ उठाने की अपील की।
शिविर में बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसे रोकने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना और समय रहते उचित कदम उठाना आवश्यक है। वहीं, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के संबंध में जानकारी देते हुए बच्चों को यौन शोषण से बचाने, अनुचित व्यवहार के प्रति सतर्क रहने तथा ऐसी किसी घटना की जानकारी मिलने पर संबंधित प्राधिकारी को सूचित करने के महत्व को समझाया गया।
कार्यक्रम के दौरान पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी संदेश दिया। नाटक के माध्यम से कन्या भ्रूण हत्या के दुष्परिणामों को उजागर करते हुए बालिकाओं के जन्म, सम्मान और समान अधिकारों का संदेश दिया गया। साथ ही बाल विवाह से होने वाले नुकसान और बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षित रखने के प्रति भी जागरूक किया गया।
शिविर के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण के साथ-साथ सामाजिक भेदभाव समाप्त करने तथा बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।

