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श्रमदान से सड़क बनाने में जुटे चौंडा सिराईं के ग्रामीण, डीएम ने लोक निर्माण विभाग को लगाई फटकार

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डीएम ने एसडीएम, लोनिवि के अधिशासी अभियंता और डीएफओ को मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता करने के दिए निर्देश, चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

 

रुद्रप्रयाग। चौंडा-मुरचौंडा-पालीगाड़ सड़क निर्माण की मांग को लेकर चौंडा सिराईं के ग्रामीणों का संघर्ष तेज हो गया है। लंबे समय से सड़क की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीण 16 अक्टूबर से स्वयं श्रमदान कर सड़क बनाने में जुटे हैं। ग्रामीणों की इस पहल के बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने पर सड़क निर्माण संघर्ष समिति और भरदार जागरूकता मंच ने नाराजगी जताई है। शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी विशाल मिश्रा सहित संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और शनिवार को मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता करने के निर्देश दिए।

 

सड़क निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक जसोधर सेमवाल, भरदार जागरूकता मंच के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद डिमरी और महासचिव भगत चौहान ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और प्रभागीय वनाधिकारी से मुलाकात कर सड़क निर्माण की मांग उठाई। इसके बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अधिकारियों और संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने मामले पर नाराजगी जताते हुए उप जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और प्रभागीय वनाधिकारी को शनिवार को मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से वार्ता करने के निर्देश दिए।

 

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

रुद्रप्रयाग। संघर्ष समिति के संयोजक जसोधर सेमवाल ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। 16 अक्टूबर से ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर सड़क बनाने का प्रयास कर रहे हैं, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों से मुलाकात के बाद अब उम्मीद जगी है। चेतावनी दी कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो चौंडा सिराईं के ग्रामीण चुनाव बहिष्कार करेंगे।

 

मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं ग्रामीण

 

रुद्रप्रयाग। भरदार जागरूकता मंच के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद डिमरी ने कहा कि 21वीं सदी में भी दूरस्थ पहाड़ी गांवों के लोग सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर कर सड़क निर्माण का रास्ता साफ करने की मांग की। वहीं, मंच के महासचिव भगत चौहान ने कहा कि बड़े प्रोजेक्टों में नियम-कानून बाधा नहीं बनते, लेकिन आम जनता से जुड़े कार्यों में विभिन्न अड़चनें सामने आती हैं। इस तरह के दोहरे मापदंडों से लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने पहाड़ी गांवों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की।

 

अब ग्रामीणों की निगाहें शनिवार को प्रस्तावित विभागीय अधिकारियों के दौरे पर टिकी हैं। देखना होगा कि मौके पर होने वाली वार्ता के बाद सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल हो पाती है या ग्रामीणों का संघर्ष आगे भी

जारी रहता है।