05 पुरुष और 04 महिलाओं का देहरादून में होगा निःशुल्क ऑपरेशन, 16 ग्रामीणों को वितरित की गई दवाएं, 05 सितंबर को मनसूना में लगेगा अगला शिविर,
रुद्रप्रयाग। राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, रुद्रप्रयाग के तत्वावधान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद शिविर में क्षेत्र के 22 ग्रामीणों की नेत्र जांच की गई। जांच के दौरान 9 लोगों में मोतियाबिंद की समस्या पाई गई, जिनका देहरादून स्थित विवेकानंद नेत्रालय में निःशुल्क ऑपरेशन कराया जाएगा। इनमें पांच पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सीमा टेकचंदानी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में आयोजित शिविर में विवेकानंद नेत्रालय, रामकृष्ण मिशन आश्रम, किशनपुर देहरादून की विशेषज्ञ स्वास्थ्य टीम ने 12 पुरुषों और 10 महिलाओं सहित कुल 22 लोगों के नेत्रों की जांच की। जांच में 5 पुरुषों और 4 महिलाओं में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। सभी चयनित मरीजों का विवेकानंद नेत्रालय, देहरादून में निःशुल्क ऑपरेशन कराया जाएगा। मरीजों को संबंधित स्वास्थ्य टीम द्वारा रविवार को उपचार के लिए देहरादून ले जाया जाएगा। शिविर के दौरान 16 ग्रामीणों को आवश्यक दवाएं भी निःशुल्क वितरित की गईं।
डॉ. सीमा टेकचंदानी ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बेहतर नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार निःशुल्क नेत्र एवं मोतियाबिंद शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अगला निःशुल्क मोतियाबिंद शिविर 05 सितंबर को ग्राम सभा मनसूना में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इन शिविरों का लाभ उठाने की अपील की। शिविरों से संबंधित अधिक जानकारी के लिए ग्रामीण अपने क्षेत्र की आशा फेसिलिटेटर अथवा आशा कार्यकत्री से संपर्क कर सकते हैं।
शिविर के दौरान 08 सितंबर तक मनाए जा रहे नेत्रदान पखवाड़े के तहत जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. खुशपाल ने ग्रामीणों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि नेत्र के एक महत्वपूर्ण हिस्से कॉर्निया के प्रत्यारोपण के माध्यम से नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कॉर्निया की भारी कमी के कारण नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। नेत्रदान एक महान और नेक कार्य है, जिसके माध्यम से जरूरतमंद व्यक्ति को दृष्टि का अमूल्य उपहार दिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद नेत्रदान किया जाता है और मृत्यु के 6 से 8 घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की जानी आवश्यक होती है। नेत्रदान के लिए चिकित्सकीय टीम स्वयं घर पहुंचकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करती है और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। किसी भी उम्र का व्यक्ति जीवनकाल में नेत्रदान की प्रतिज्ञा कर सकता है, हालांकि दान के समय कॉर्निया का स्वस्थ और साफ होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति ने जीवनकाल में नेत्रदान की घोषणा नहीं की हो, तब भी उसकी मृत्यु के बाद उसके परिजन नेत्रदान का निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन लोगों को दृष्टि मिल सकती है।
डॉ. खुशपाल ने लोगों को नेत्र सुरक्षा के प्रति भी जागरूक करते हुए वर्ष में कम से कम एक बार नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नुकीली वस्तुओं और ऐसे खिलौनों से दूर रखने, आई फ्लू होने पर नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेने तथा चिकित्सकीय सलाह के बिना आंखों में किसी भी प्रकार की दवा का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की। नेत्रदान से संबंधित अधिक जानकारी के लिए हेल्थ हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है। शिविर में विवेकानंद नेत्रालय, रामकृष्ण मिशन आश्रम, किशनपुर देहरादून के दृष्टिमितिज्ञ हनुमंत सिंह पंवार, राकेश कुंवर सहित स्वास्थ्य टीम के अन्य सदस्य
मौजूद रहे।

