रुद्रप्रयाग।
सनातन धर्म की रक्षा, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और हिंदू समाज की संगठित शक्ति के प्रदर्शन के रूप में जनपद मुख्यालय रुद्रप्रयाग में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सनातन धर्म हिंदू सम्मेलन समिति के सहयोग से हुए इस आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि हिंदू समाज अब अपनी परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए एकजुट होकर निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है।
सम्मेलन में आगामी सौ वर्षों के लिए हिंदू समाज के “पंच परिवर्तन” के संकल्प को दोहराते हुए सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और संगठन की मजबूती पर खुलकर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता में निहित है और विघटन ही सबसे बड़ा खतरा है।
मुख्य वक्ता कोटेश्वर पीठ के महंत शिवानंद गिरी, केंद्रीय विश्वविद्यालय की शिक्षाविद् डॉ. कविता भट्ट तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुनील जी ने मंच से समाज को स्पष्ट संदेश दिया कि परंपरा, संस्कार और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रत्येक हिंदू को सक्रिय होना होगा।
कार्यक्रम संयोजक आचार्य दीपक नौटियाल ने कहा कि हिंदू धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जिसकी रक्षा सामूहिक दायित्व है। कार्यक्रम का सशक्त संचालन एकल अभियान के संभाग प्रमुख कालका प्रसाद सेमवाल ने किया।
सम्मेलन के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। संयुक्त परिवार की परंपरा को सहेजने वाली विशेश्वरी देवी नौटियाल, फौंदी देवी, यशोदा देवी, सुलोचना भंडारी, गौ सेविका शाकंबरी देवी, मुन्नी नौटियाल, पर्यावरणविद् जगत सिंह ‘जंगली’, हिंदू नाई ठाकुर नरेश एवं प्रवीण को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह ने हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया। सम्मेलन हिंदू चेतना और सामाजिक संगठन की मजबूती का संदेश देकर संपन्न
हुआ।