Jun 04, 2026

पुस्तकालय गाँव मणिगुह शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक चेतना का बना केंद्र, दो दिवसीय ‘गाँव घर महोत्सव’ का चौथा संस्करण संपन्न,

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अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग। उत्तराखण्ड के प्रथम पुस्तकालय गाँव मणिगुह में आयोजित दो दिवसीय ‘गाँव घर महोत्सव’ का चौथा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। ज्ञान, संस्कृति, लोक परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता को समर्पित इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कलाकारों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

महोत्सव का शुभारंभ सरस्वती एवं भगवती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर पुस्तकालय से कार्तिक स्वामी मंदिर तक पुस्तक यात्रा निकाली गई, जो विभिन्न पुस्तक मंदिरों से होकर गुजरी। इसी यात्रा के साथ महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन किया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने पुस्तकालय के नव-निर्मित अध्ययन कक्ष का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और पुस्तकालय गाँव मणिगुह इस दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि मणिगुह में ज्ञान को जन-आंदोलन का स्वरूप दिया गया है, जो सीमित संसाधनों में भी सामुदायिक संकल्प की शक्ति को दर्शाता है। उन्होंने भविष्य में भी विश्वविद्यालय की ओर से शैक्षिक सहयोग जारी रखने का आश्वासन दिया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में गोद लिए गए आठ गाँवों में मणिगुह भी शामिल है।

‘हिमालयी ज्ञान परंपरा’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में जीत सिंह सेमवाल और मनमीत ने पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं कवि सम्मेलन में हर्ष काफर, अविनाश मिश्र, पंकज प्रखर और सुभाष पहाड़ी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोकजीवन, प्रकृति और समकालीन सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति दी।

महोत्सव में गढ़वाल के पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। स्थानीय महिलाओं ने अतिथियों को इन व्यंजनों के सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया। बच्चों और युवाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। शाम को प्रसिद्ध ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी की चर्चित फिल्म चिल्ड्रन ऑफ हेवन का प्रदर्शन किया गया।

दूसरे दिन प्रसिद्ध व्लॉगर संदीप गोसाईं ने ग्रामीण विषयों पर व्लॉगिंग की संभावनाओं को लेकर युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम ग्रामीण समाज की आवाज को वैश्विक मंच तक पहुँचाने का प्रभावी साधन बन सकते हैं। बच्चों के लिए आयोजित निबंध प्रतियोगिता और नाट्य कार्यशाला भी आकर्षण का केंद्र रही। नाट्य कार्यशाला का संचालन पुनीता चीरा ने किया।

महोत्सव के दौरान फाउंडेशन के सहयोगी गजेन्द्र रौतेला ने बच्चों के साथ लोककवि गिर्दा का प्रसिद्ध गीत ‘उत्तराखण्ड मेरी मातृभूमि’ प्रस्तुत किया, जिसने पूरे वातावरण को भावुक और उत्साहपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम का संचालन गाँव की छात्रा स्नेहा राणा ने किया। समापन सत्र में पुरस्कार वितरण, धन्यवाद ज्ञापन और आगामी योजनाओं की घोषणा की गई।

दो दिनों तक चले इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि जब ज्ञान, संस्कृति और सामुदायिक चेतना एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो गाँव केवल आबादी के केंद्र नहीं रहते, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रयोगशाला बन जाते हैं।

 

पुस्तकालय गाँव मणिगुह बना सामाजिक परिवर्तन का मॉडल,

 

रुद्रप्रयाग। वर्ष 2023 में स्थापित पुस्तकालय गाँव मणिगुह आज देशभर में एक अभिनव ग्रामीण पहल के रूप में पहचान बना चुका है। शुरुआत में जहाँ पुस्तकालय में लगभग चार हजार पुस्तकें थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 21 हजार से अधिक हो चुकी है। पुस्तकालय के साथ स्थापित आठ पुस्तक मंदिर ग्रामीणों तक पुस्तकों की सहज पहुँच सुनिश्चित कर रहे हैं। इस पहल की शुरुआत ‘हमारा गाँव घर फाउंडेशन’ के संस्थापक सदस्यों सुमन मिश्र, बीना मिश्र, आलोक सोनी और राहुल रावत ने मिलकर की थी। फाउंडेशन की सह-संस्थापक बीना मिश्र के अनुसार, उद्देश्य केवल पुस्तकालय की स्थापना नहीं, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को ग्रामीण जीवन का हिस्सा बनाना था। उन्होंने बताया कि पुस्तक मंदिरों की अवधारणा इसी सोच से विकसित हुई, ताकि ज्ञान स्वयं लोगों तक पहुँचे।

राहुल रावत ने कहा कि मणिगुह आज इस बात का उदाहरण बन चुका है कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से गाँवों में शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस मॉडल को उत्तराखण्ड के अन्य गाँवों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।