Jun 06, 2026

पहली ही बारिश में बह गई करोड़ों की सुरक्षा, रामपुर भू-धंसाव जोन में ढही क्रेट वायर, उठे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल

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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामपुर बाजार के समीप स्थित संवेदनशील भू-धंसाव जोन में करोड़ों रुपये की लागत से किए गए सुरक्षा कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहली ही बारिश में सुरक्षा कार्य का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे मिट्टी धंसने के साथ क्रेट वायर भी ढह गई। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों में भारी नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार, रामपुर बाजार के समीप पिछले दो वर्षों से अधिक समय से भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में मार्च-अप्रैल माह में सुरक्षा दीवार और क्रेट वायर का निर्माण कराया गया था, लेकिन जून के प्रथम सप्ताह में हुई बारिश ने ही इन कार्यों की पोल खोल दी। सड़क किनारे की मिट्टी धंसने से क्रेट वायर क्षतिग्रस्त हो गई और भू-धंसाव का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है।

घटना के समय सड़क किनारे कुछ वाहन खड़े थे। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ। हालांकि वाहनों के पहिए मिट्टी में धंस गए थे, जिन्हें समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सुरक्षा कार्य टिकाऊ साबित नहीं हो पा रहे हैं। उनका कहना है कि एक वर्ष पूर्व नदी किनारे बनाई गई सुरक्षा दीवार भी पहली ही बरसात में क्षतिग्रस्त हो गई थी और अब हाल ही में किया गया कार्य भी शुरुआती बारिश नहीं झेल पाया।

पूर्व ग्राम प्रधान न्यालसू प्रमोद सिंह रावत ने कहा कि सरकार सुरक्षा कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत कर रही है, लेकिन संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था की लापरवाही के कारण जनता और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी उपचार नहीं किया गया तो भू-धंसाव का असर मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच सकता है, जिससे यातायात भी प्रभावित हो सकता है।

स्थानीय व्यवसायी संदीप सिंह रावत ने भी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाल ही में किए गए सुरक्षा कार्य पहली ही बारिश में ढह गए, जो गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रामपुर बाजार और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भू-धंसाव का खतरा लगातार बना रहेगा।

उधर, एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडे ने बताया कि क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण कर आवश्यक उपचार एवं मरम्मत कार्य के निर्देश दे दिए गए हैं।