Feb 14, 2026

नगर पालिका रुद्रप्रयाग का 'अजीब' कारनामा, ज्ञान के मंदिर को थमाया हाउस टैक्स का नोटिस

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रुद्रप्रयाग। नगर पालिका परिषद रुद्रप्रयाग अपनी कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार पालिका ने एक ऐसा 'गजब' खेल खेला है जिसने शिक्षा विभाग से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। पालिका प्रशासन ने शहर के प्रतिष्ठित राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग को हाउस टैक्स भरने का नोटिस जारी कर दिया है।

सरकारी स्कूल से टैक्स की वसूली, चर्चा का विषय

आमतौर पर सरकारी शिक्षण संस्थान और धर्मार्थ संपत्तियां निकाय करों के दायरे से बाहर या विशेष छूट की श्रेणी में होती हैं। लेकिन पालिका के इस नोटिस ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और मुफ्त शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों पर ही टैक्स का बोझ डाला जा रहा है।

क्या अब क्लास में बैठने का भी लगेगा टैक्स?

इस नोटिस के बाद सोशल मीडिया और शहर के गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग चुटकी लेते हुए पूछ रहे हैं कि "क्या अब स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों और पढ़ाने वाले गुरुजनों को भी कक्षा-कक्षों में बैठने के लिए अलग से टैक्स देना होगा?" सवाल यह भी उठ रहा है कि जो स्कूल सीमित संसाधनों और सरकारी बजट के भरोसे चल रहे हैं, वे लाखों का हाउस टैक्स कहां से भरेंगे?

एक विभाग से दूसरे को नोटिस: प्रशासनिक तालमेल पर सवाल

जानकारों का मानना है कि राजकीय इंटर कॉलेज एक पूर्णतः सरकारी संस्थान है। ऐसे में एक सरकारी निकाय (नगर पालिका) द्वारा दूसरे सरकारी संस्थान को नोटिस भेजना केवल कागजी खानापूर्ति और आपसी तालमेल की कमी को दर्शाता है। यदि स्कूल को यह टैक्स भरना पड़ा, तो इसका सीधा असर स्कूल के रखरखाव और छात्र कल्याण कोष पर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं नियम?

नगर पालिका अधिनियमों के तहत सार्वजनिक उपयोग और शैक्षिक कार्यों के लिए प्रयुक्त भवनों को अक्सर कर से मुक्त रखा जाता है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस नोटिस का जवाब कैसे देता है और क्या नगर पालिका अपने इस 'अतरंगी' फैसले को वापस लेती है या नहीं।