अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग। मंदाकिनी घाटी के आराध्य भगवान अगस्त्य मुनि महाराज की पावन ’देवरा यात्रा’ का प्रथम चरण पूर्ण धार्मिक श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हो गई है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर प्रारंभ हुई यह यात्रा ठीक एक माह के भ्रमण के बाद अपने मूल मंदिर पहुंची।
लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुई यह देवरा यात्रा क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का केंद्र बनी रही। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने नंगे पांव चलकर और निराहार व्रत रखकर अपनी अटूट भक्ति का परिचय दिया। देवडोली ने एक माह के दौरान दर्जनों गांवों का भ्रमण कर भक्तों को उनके घर-द्वार पर आशीर्वाद प्रदान किया। मंदिर के गर्भगृह से बाहर आने के बाद यात्रा का पड़ाव नाकोट, धान्यूं, विजयनगर, बनियाड़ी, सौड़ी, चमेली और रुमसी जैसे गांवों से होकर गुजरा। बावई गांव में भगवान अगस्त्य मुनि ने पांच दिनों तक प्रवास कर भक्तों को दर्शन दिए। इसके पश्चात यात्रा मालकोटी (थोकदार गांव) और बेंजी (कुल पुरोहितों के गांव) होते हुए सिल्ली पहुंची, जहां रात्रि विश्राम के बाद डोली मुख्य मंदिर लौटी।
मंदिर वापसी पर भगवान अगस्त्य मुनि महाराज की डोली ने अगस्त्यमुनि खेल मैदान स्थित अपने ’दयूके’ (नृत्य स्थल) में पारंपरिक नृत्य किया। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े, जिससे पूरा वातावरण ’जय हो मुनि महाराज’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मुनि महाराज मंदिर के पूजारी योगेश बेंजवाल ने बताया कि भगवान की यह यात्रा सनातन संस्कृति की जीवंत मिसाल है। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष ’पंचसिल्ला का देवरा’ भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक यात्रा में आचार्य भूपेंद्र बेंजवाल, सुनील बेंजवाल, हरि सिंह रावत, मनवर सिंह रावत और दलीप सिंह रावत सहित भारी संख्या में भक्तों ने सहभागिता की।