अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न शिव मंदिरों में भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रातः काल से ही मंदिरों में “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे और शिवभक्तों ने जल, बेलपत्र, पुष्प, घी, दही, तेल और चंदन अर्पित कर भगवान शिव से परिवार के सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
क्षेत्र के प्रसिद्ध अगस्तेश्वर मंदिर, गंगतल महादेव मंदिर, सिल्ला सांडेश्वर महादेव मंदिर, चन्द्रापुरी शिवालय, हाट का प्राचीन शिवालय तथा चन्द्रेशेखर महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु व्यवस्थित ढंग से लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।
अगस्त्यमुनि स्थित अगस्तेश्वर मंदिर में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा और पूरे दिन जलाभिषेक का क्रम जारी रहा। पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए अगस्त्य मंदिर के आचार्य पं. भूपेन्द्र बेंजवाल ने बताया कि भगवान अगस्त्य द्वारा इस धरा पर सर्वप्रथम शिवलिंग की स्थापना की गई थी, इसलिए इस शिवलिंग को अगस्त्येश्वर के नाम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में भगवान शिव के दिव्य भोग विग्रह को भगवान अगस्त्य के गर्भगृह से निकालकर महादेव मंदिर में लाया जाता है, जहां विधिवत पूजन के पश्चात विग्रह को शिवलिंग के ऊपर स्थापित किया जाता है। अगस्त्येश्वर के भोग विग्रह के दर्शन अत्यंत शुभ एवं कल्याणकारी माने जाते हैं।
श्री अगस्त्य मंदिर के मठाधीश पं. योगेश बेंजवाल ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर प्रातः से ही विशेष पूजा-अर्चना आरंभ हो गई थी और दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते रहे। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा और शिवालयों में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।