Apr 03, 2026
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41 वर्षों बाद बणसू गांव में आयोजित नौ दिवसीय महायज्ञ संपंन, केदारघाटी में छाया भक्तिमय माहौल

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रुद्रप्रयाग/ऊखीमठ। प्रकृति की मनमोहक वादियों और सीढ़ीनुमा खेत-खलिहानों के बीच बसे बणसू गांव में भगवती राज-राजेश्वरी मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपंन हो गया। 41 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस महायज्ञ ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
महायज्ञ के दौरान बणसू गांव सहित समूची केदारघाटी का वातावरण नौ दिनों तक भक्तिमय बना रहा। प्रतिदिन वेद मंत्रों की गूंज, धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने आयोजन को भव्यता प्रदान की। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
आयोजन के दौरान ग्रामीणों की ओर से नौ दिनों तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। गांव के प्रत्येक परिवार ने बढ़-चढ़कर सहयोग करते हुए सामाजिक एकता और धार्मिक आस्था का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। समापन अवसर पर राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने महायज्ञ की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन हमारी संस्कृति और परंपराओं को मजबूत करते हैं तथा समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। महायज्ञ के सफल आयोजन पर मंदिर समिति और ग्रामीणों ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से ही इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफलतापूर्वक संपंन किया जा सका। इस अवसर पर पूर्व कनिष्ठ प्रमुख शैलेंद्र कोटवाल, पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष मदन सिंह रावत, यज्ञाचार्य हरि ओम देवशाली, ब्रह्म अमित भट्ट, विनोद  देवशाली अध्यक्ष राम सिंह राणा, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह राणा, सचिव दिनेश राणा, कोषाध्यक्ष लक्ष्मण राणा, प्रधान दर्शनी देवी, सुभाष रावत, क्षेपंस अनूप राणा, राजेन्द्र राणा, सुबोध राणा, दिनेश राणा, हीरा सिंह राणा, वन पंचायत सरपंच गैणिया सिंह, नव युवक मंगल दल अध्यक्ष अजीत राणा महिला मंगल दल अध्यक्ष ममता देवी, रूचि रावत, सुरजीत सिंह, आत्माराम बहुगुणा, किशन राणा, प्रताप राणा, दलीप राणा, गंगा सिंह राणा, प्रदीप राणा, विक्की राणा, अनिल सिंह, जगत सिंह, सहित 25  कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, 25 विद्वान आचार्य और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। महायज्ञ के समापन के साथ ही बणसू गांव में आध्यात्मिक उल्लास और संतोष का माहौल व्याप्त हो गया, जिसकी स्मृतियां लंबे समय तक लोगों के मन में बनी रहेंगी।