Jun 16, 2026

नेपाल के अधिकारियों ने तलहटी सीमाओं पर काम करने वाले सीमा पार आपराधिक नेटवर्कों को खत्म करने की मजबूत प्रतिबद्धता जताई

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भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर समन्वय, शांति व्यवस्था और सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से नेपाल में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण मैत्री बैठक आयोजित की गई। इस सम्मेलन में दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के प्रशासनिक, पुलिस और सुरक्षा बलों के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत-नेपाल सीमा पर स्थित 'नो मैन्स लैंड' में बढ़ रहे अवैध अतिक्रमण को रोकना और समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुके सीमा पिलरों का पुनर्स्थापन करना रहा।

बैठक के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई कि सीमा रेखा को स्पष्ट करने वाले कई पिलर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसका फायदा उठाकर कुछ क्षेत्रों में अतिक्रमण की स्थिति पैदा हुई है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि सीमा सुरक्षा बल (SSB) और दोनों देशों के सर्वे विभाग की टीमें संयुक्त रूप से एक व्यापक सर्वेक्षण करेंगी। इस सर्वे के जरिए सबसे पहले क्षतिग्रस्त पिलरों की पहचान की जाएगी और उसके तुरंत बाद 'नो मैन्स लैंड' से हर प्रकार का अतिक्रमण हटाने के लिए एक समन्वित और संयुक्त अभियान शुरू किया जाएगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बैठक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रोटी-बेटी और सांस्कृतिक संबंध हैं। सीमा संबंधी किसी भी गलतफहमी या समस्या को दूर करने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच ऐसा नियमित संवाद और समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने भरोसा जताया कि संयुक्त टीमों की त्वरित कार्रवाई से पिलरों का पुनर्स्थापन कार्य शीघ्र ही धरातल पर दिखने लगेगा। वहीं, नेपाल की ओर से शामिल जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भारत को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उपजे इस बेहतर तालमेल से सीमा क्षेत्र के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इसके साथ ही बैठक में सीमा पार से होने वाली किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों, तस्करी और घुसपैठ को रोकने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने तथा आपसी सहयोग को नया विस्तार देने का भी संकल्प लिया गया।