Apr 23, 2026

न्यूनतम मानक और जवाबदेही: उत्तराखंड सरकार की शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की पहल

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देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा जगत में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए धामी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों की मनमानी रोकने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 'राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण' के गठन की कवायद तेज हो गई है। यह प्राधिकरण न केवल स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक तय करेगा, बल्कि निजी स्कूलों में बेतहाशा बढ़ती फीस और अन्य शिकायतों पर अंकुश लगाने का काम भी करेगा।

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में जल्द ही “राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण” का गठन किया जाएगा, जो सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों के लिए न्यूनतम मानक तय करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निजी स्कूलों द्वारा की जा रही फीस की मनमानी और सुविधाओं की कमी जैसी शिकायतों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे नए ड्राफ्ट के तहत यह प्राधिकरण राज्य के सभी 16,501 सरकारी और 5,396 निजी विद्यालयों के लिए एक समान मानक निर्धारित करेगा। इसके जरिए स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली विषय-वस्तु, फीस संरचना और अन्य आवश्यक जानकारियों को सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। इससे अभिभावकों को पारदर्शी जानकारी मिल सकेगी और स्कूलों की जवाबदेही भी तय होगी।

प्राधिकरण का दायरा केवल फीस नियंत्रण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह स्कूलों की गुणवत्ता सुधार पर भी फोकस करेगा। निजी विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतनमान तय करने का अधिकार भी इसी संस्था के पास होगा। साथ ही, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षा मानक, आधारभूत ढांचा और शिक्षकों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करना भी इसकी जिम्मेदारी होगी। यह प्राधिकरण एक अर्धन्यायिक संस्था के रूप में कार्य करेगा, जिसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार भी होगा। यदि कोई स्कूल निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है, तो प्राधिकरण उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकेगा, यहां तक कि उसकी मान्यता भी समाप्त की जा सकती है। इससे शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन और गुणवत्ता दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्राधिकरण के गठन को लेकर हाल ही में शासन स्तर पर बैठक भी आयोजित की गई है। बैठक में वित्त विभाग ने सुझाव दिया है कि प्राधिकरण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नया ड्राफ्ट तैयार किया जाए, जिसमें शिक्षा विभाग के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यापक और संतुलित हो सकेगी। संरचना की बात करें तो प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य शामिल होंगे। अध्यक्ष पद के लिए किसी शिक्षाविद, सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी या न्यायिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जैसे महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा और एससीईआरटी के निदेशक, सीबीएसई और आईसीएसई से जुड़े स्कूलों के प्रधानाचार्य तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। अपर शिक्षा निदेशक पद्मेंद्र सकलानी के अनुसार, प्राधिकरण को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली आगामी बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण का गठन उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल फीस की अनियमितताओं पर रोक लगेगी, बल्कि स्कूलों की गुणवत्ता और पारदर्शिता भी बेहतर होगी, जिसका सीधा लाभ छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा।