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धूमधाम से मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती, शोभायात्रा में उमड़ा समाज

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रात्रि जागरण में भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल, ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे श्रद्धालु; युवाओं ने दिखाए हैरतअंगेज करतब,

रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में महर्षि वाल्मीकि जयंती धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। जिला मुख्यालय सहित जनपद के विभिन्न स्थानों पर वाल्मीकि समाज के लोगों ने रात्रि जागरण, पूजा-अर्चना और भव्य शोभायात्रा के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धासुमन अर्पित किए। जयंती के अवसर पर नगर में निकाली गई शोभायात्रा आकर्षण का केंद्र रही। इसमें बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भागीदारी की।

 

महर्षि वाल्मीकि जयंती की पूर्व संध्या पर वाल्मीकि बस्ती में भव्य रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। इसमें स्थानीय कलाकारों ने सुंदर भजनों की प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रातभर श्रद्धालु भजनों में लीन रहे। सोमवार सुबह वाल्मीकि मंदिर में परंपरानुसार विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत सहित सभी सभासद वाल्मीकि बस्ती पहुंचे और समाज के लोगों को जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पूजन कार्यक्रम में भी प्रतिभाग किया।

 

दोपहर बाद वाल्मीकि बस्ती से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच निकली शोभायात्रा में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। युवाओं ने विभिन्न करतबों का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जबकि ढोल की थाप पर किए गए पारंपरिक नृत्य ने शोभायात्रा की रौनक बढ़ा दी। नगर के मुख्य बाजार सहित विभिन्न स्थानों पर व्यापारियों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और समाज के लोगों को जयंती की बधाई दी।

 

शोभायात्रा वाल्मीकि बस्ती से शुरू होकर नया बस अड्डा, मुख्य बाजार और केदारनाथ तिराहे से होते हुए पुनः वाल्मीकि बस्ती पहुंचकर संपन्न हुई। शोभायात्रा के दौरान बाजार में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के आदिकवि तथा महाकाव्य रामायण के रचयिता के रूप में पूजनीय हैं। उनकी रचना रामायण में सत्य, धर्म, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा जैसे आदर्शों का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। वाल्मीकि जयंती उनके जीवन, साहित्यिक योगदान और आदर्शों का स्मरण करने के साथ ही सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने का संदेश भी देती है। इस अवसर पर मनीष गोडियाल, मनोज, सुंदर, कैलाश, रविंद्र, रिंकू, अमनदीप सहित वाल्मीकि समाज के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।