रुद्रप्रयाग। मयाली शराब ठेके का मामला अब एक साधारण ओवररेटिंग विवाद नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहे माफिया तंत्र का उदाहरण बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल स्टिंग वीडियो में साफ तौर पर ठेके पर शराब की बोतल निर्धारित कीमत से अधिक 850 रुपये में बेचने की बात सामने आई, जहां खुद ठेके का कर्मचारी यह कहते सुना गया कि “शराब महंगी हो गई है।
वीडियो सामने आते ही ठेका मालिक और उनके लोगों ने सच्चाई को दबाने के लिए दबाव और धमकियों का सहारा लेना शुरू कर दिया। स्टिंग करने वाले पत्रकारों और वीडियो में शामिल लोगों को फोन कर गाली-गलौज, डराने-धमकाने और जबरन झूठा बयान दिलवाने की कोशिश की जा रही है। उनसे यह कहलवाने का प्रयास हो रहा है कि ठेके पर 810 रुपये ही मांगे जा रहे थे, जबकि वीडियो में साफ तौर पर 850 रुपये की मांग दर्ज है। यह पूरा घटनाक्रम साफ दिखाता है कि पहले ग्राहकों से अवैध वसूली की जाती है और जब मामला उजागर होता है तो सच्चाई को दबाने के लिए संगठित तरीके से काम किया जाता है।
मयाली ही नहीं, बल्कि रुद्रप्रयाग के कई शराब ठेकों पर लंबे समय से ओवररेटिंग, बदसलूकी और मनमानी की शिकायतें सामने आती रही हैं। “लेना है तो लो, वरना जाओ” जैसे व्यवहार के साथ ग्राहकों को अपमानित करना आम बात बन चुकी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि केदारनाथ यात्रा मार्ग जैसे धार्मिक और संवेदनशील क्षेत्र में भी इस तरह की लूट जारी है, जहां तीर्थयात्री और स्थानीय लोग दोनों इसका शिकार बन रहे हैं।
जब भी कोई व्यक्ति या पत्रकार इस तरह की अनियमितताओं को उजागर करता है, तब ठेका संचालक अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाते हैं। फोन कॉल्स, धमकियां, झूठे बयान और वीडियो बनवाने की कोशिशें इस पूरे सिस्टम का हिस्सा बन चुकी हैं, जो यह संकेत देती हैं कि यह सिर्फ एक दुकान का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और आबकारी विभाग की भूमिका पर उठता है। वायरल वीडियो जैसे ठोस सबूत सामने होने के बावजूद अब तक कोई ठोस और सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह संदेह गहराता है कि कहीं न कहीं या तो लापरवाही है या फिर दबाव और मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं हो रही।
ऐसी स्थिति में जरूरी है कि आबकारी विभाग तत्काल मयाली ठेके की निष्पक्ष जांच कराए, वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाए और ओवररेटिंग के प्रमाण मिलने पर ठेका मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए लाइसेंस रद्द किया जाए। साथ ही, धमकियां देने वालों के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए। पूरे जिले में शराब ठेकों पर सघन चेकिंग अभियान चलाकर रेट लिस्ट और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना भी आवश्यक है।
यह मामला केवल एक ठेके की अनियमितता नहीं, बल्कि उस खतरनाक व्यवस्था को उजागर करता है जहां आम जनता से खुलेआम लूट की जाती है, सच्चाई सामने लाने वालों को डराया जाता है और सिस्टम खामोश नजर आता है। अब जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। यदि इस बार भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चुप्पी खुद बहुत कुछ कह जाएगी।
वहीं, आबकारी अधिकारी रमेश बंगवाल का कहना है कि मामले में जांच की जाएगी। ठेका संचालक की गलती पाए जाने पर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।