रुद्रप्रयाग। आगामी केदारनाथ यात्रा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। यात्रा मार्गों को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और समाजसेवियों का आरोप है कि प्रशासन गरीबों पर सख्ती दिखा रहा है, जबकि रसूखदारों को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे “गैरों पे करम, अपनों पे सितम” वाली कहावत चरितार्थ होती दिखाई दे रही है।
यात्रा मार्ग पर अस्थायी कच्ची दुकानें लगाकर छह माह तक अपनी आजीविका चलाने वाले स्थानीय बेरोजगार युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों पर प्रशासन की कार्रवाई सबसे अधिक देखने को मिल रही है। इन दुकानों को हटाए जाने से उनके सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर, आरोप है कि हाईवे चौड़ीकरण के दौरान भारी मुआवजा प्राप्त कर चुके रसूखदार लोग पुनः अतिक्रमण कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। तिलवाड़ा सहित कई स्थानों पर ऐसे उदाहरण सामने आने की बात स्थानीय लोग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन का रवैया पूरी तरह भेदभावपूर्ण है। जहां एक ओर गरीबों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हटाया जा रहा है, वहीं प्रभावशाली लोगों को अवैध निर्माण करने की खुली छूट दी जा रही है। इतना ही नहीं, छोटे दुकानदारों से शुल्क वसूले जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। इस दोहरे मापदंड को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और समाजसेवियों ने प्रशासन से पारदर्शिता व समान कार्रवाई की मांग की है।
मामले में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा का कहना है कि केदारनाथ यात्रा मार्गों पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजमार्ग किनारे बिना अनुमति के दुकानें लगाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
केदारनाथ यात्रा जैसे बड़े आयोजन से पहले प्रशासन की सख्ती जहां आवश्यक मानी जा रही है, वहीं कार्रवाई में समानता और निष्पक्षता का अभाव स्थानीय असंतोष को जन्म दे रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या सभी के लिए समान नियम लागू किए जाते हैं या नहीं।