Feb 09, 2026

केदारघाटी में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष, ग्रामीणों में भय और आक्रोश,, ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे,, वन विभाग के दावे खोखले,

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नितिन जमलोकी

 

फाटा/रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में गुलदार द्वारा एक बालक को उठा ले जाने की घटना के बाद केदारघाटी क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के कई गांवों में ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

केदारघाटी के शेरसी, बड़ासू, न्यालसू और त्रियुगीनारायण गांवों में बीते दिनों गुलदार के हमलों में दस से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है। घटनाओं के बाद वन विभाग द्वारा गांवों में गश्त शुरू करने, ट्रैप कैमरे और सायरन लगाने की बात कही गई थी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ये प्रयास कुछ ही दिनों में सीमित होकर रह गए।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले भालू के हमलों में लोग घायल हुए, लेकिन उन घटनाओं पर भी वन विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद गुलदार के हमलों में मवेशियों की जान गई, जिस पर विभाग ने केवल औपचारिकता निभाते हुए एक-दो दिन गश्त कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। वर्तमान में न्याय पंचायत क्षेत्र के कई गांवों में गुलदार और भालू की लगातार धमक देखी जा रही है, जिससे ग्रामीणों में भय और चिंता बढ़ गई है।

ग्राम शेरसी के सरपंच मोहन नौटियाल ने बताया कि गांव में भालू और गुलदार के हमलों में मवेशियों की मौत हुई थी। वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने और नियमित गश्त का आश्वासन दिया था, लेकिन केवल सायरन लगाकर गश्त बंद कर दी गई, जिससे ग्रामीण खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

वहीं त्रियुगीनारायण निवासी राजेश भट्ट ने कहा कि गुलदार के डर से लोग देर रात गौशालाओं तक जाने से बच रहे हैं। हमलों के दौरान वन विभाग की गश्त कुछ समय के लिए हुई, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। उन्होंने मांग की कि ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए गांवों में नियमित अंतराल पर गश्त कराई जाए।

इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी गुप्तकाशी शंकर सिंह रावत ने बताया कि केदारघाटी सहित अन्य क्षेत्रों में गुलदार की घटनाओं को लेकर विभाग पूरी तरह सजग है। वन कर्मियों की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं, साथ ही सुरक्षा के लिए सायरन और ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को भी समय-समय पर सतर्कता और सुरक्षा उपायों को लेकर जागरूक किया जा रहा है।

फिलहाल ग्रामीण ठोस और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और क्षेत्र में भय का माहौल कम हो।