15 बकरियों से शुरू किया कारोबार, आज परिवार की जरूरतें खुद कर रहीं पूरी,
रुद्रप्रयाग। पहाड़ों में सीमित रोजगार के साधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच महिलाएं अब स्वरोजगार को अपनी ताकत बनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। जनपद रुद्रप्रयाग के ग्राम राऊलैंक की संगीता देवी ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने बकरी पालन को आजीविका का जरिया बनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनने का काम किया है।
संगीता देवी उड़ान स्वायत्त सहकारिता, मनसूना की सदस्य हैं। ग्रामोत्थान परियोजना रुद्रप्रयाग के माध्यम से उनका चयन व्यक्तिगत उद्यम के रूप में बकरी पालन के लिए किया गया। परियोजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये की परियोजना राशि, 50 हजार रुपये का बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया, जबकि 20 हजार रुपये का स्वयं का अंशदान उन्होंने लगाया। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने 15 बकरियों की खरीद कर अपने व्यवसाय की शुरुआत की।
शुरुआत में छोटा दिखाई देने वाला यह प्रयास अब उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रहा है। बकरी पालन के माध्यम से संगीता देवी को नियमित आमदनी का जरिया मिला है। इससे वह परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक रूप से योगदान दे रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर लगातार आगे बढ़ रही हैं।
संगीता देवी का कहना है कि “बकरी पालन ने मुझे आत्मनिर्भर बनाया है। अब मैं अपने परिवार की जरूरतें स्वयं पूरी करने में सक्षम हूं। मेरा प्रयास है कि गांव की अन्य महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ें और आर्थिक रूप से मजबूत बनें। संगीता देवी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और मेहनत का साथ मिले तो पहाड़ की महिलाएं सीमित संसाधनों में भी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रख सकती हैं।
मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र रावत ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को स्थानीय संसाधनों और उनकी क्षमता के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना ग्रामोत्थान परियोजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि बकरी पालन जैसे छोटे व्यक्तिगत उद्यम ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे सफल प्रयासों को प्रोत्साहित कर अधिक से अधिक महिलाओं को आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

