Aug 14, 2026

उच्च न्यायालय के आदेश से उपनल, पीआरडी और संविदा कर्मचारियों में समान वेतन की उम्मीद मजबूत,, समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को मिला कानूनी आधार,

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प्रदेशभर के हजारों कर्मचारियों की निगाहें न्यायालय के अगले कदम पर,,

 

नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और उपक्रमों में लंबे समय से कार्यरत उपनल (UPNL), प्रांतीय रक्षक दल (PRD) तथा अन्य संविदा कर्मचारियों से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश के बाद कर्मचारियों की समान वेतन की उम्मीद मजबूत हुई है। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विवेक कठैत ने कर्मचारियों के पक्ष को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा।

 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उपनल, पीआरडी और अन्य संविदा माध्यमों से नियुक्त कर्मचारी लंबे समय से नियमित कर्मचारियों के समान प्रकृति के कार्य और जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में कम पारिश्रमिक दिया जा रहा है। अधिवक्ता की ओर से न्यायालय के समक्ष संविधान के अनुच्छेद 14 तथा अनुच्छेद 39(डी) में निहित समानता और समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का हवाला दिया गया। तर्क दिया गया कि वर्षों तक कर्मचारियों से नियमित कार्मिकों के समान कार्य लेने के बावजूद उन्हें कम मानदेय देना उनके श्रम के उचित मूल्यांकन के प्रश्न को जन्म देता है।

 

उच्च न्यायालय के आदेश को उपनल, पीआरडी और अन्य संविदा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में वेतन और सेवा संबंधी सुविधाओं में अंतर का सामना करना पड़ रहा है।

 

न्यायालय में कर्मचारियों के अधिकारों, समानता के संवैधानिक सिद्धांत और समान कार्य के लिए समान वेतन के आधार को प्रमुखता से रखा गया। इससे प्रदेश में संविदा और आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग को कानूनी मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।

न्यायालय के आदेश के बाद प्रदेशभर में उपनल, पीआरडी और विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के बीच उम्मीद का माहौल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। उनका मानना है कि न्यायालय के आदेश से इस मांग को नई दिशा मिली है।

कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार से न्यायालय के आदेश का शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करने और पात्र कर्मचारियों को नियमानुसार इसका लाभ देने की मांग की है।

 

संविदा कर्मचारियों के लिए बन सकता है महत्वपूर्ण उदाहरण,,

कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि न्यायालय के आदेश का प्रभाव व्यापक रूप से लागू होता है तो उत्तराखंड में लंबे समय से संविदा, उपनल, पीआरडी और अन्य आउटसोर्स व्यवस्थाओं के माध्यम से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के वेतन एवं सेवा शर्तों से जुड़े मामलों के लिए यह महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

 

हालांकि, आदेश का वास्तविक प्रभाव किन कर्मचारियों और किन सेवा शर्तों पर लागू होगा, यह न्यायालय के आदेश की विस्तृत शर्तों तथा संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस आदेश ने प्रदेशभर के हजारों संविदा कर्मचारियों में समान वेतन और बेहतर सेवा शर्तों को लेकर नई उम्मीद जगा दी है।