Jul 03, 2026

बद्रीनाथ धाम चढ़ावा प्रकरण की होगी जांच, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: बीकेटीसी

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सोशल मीडिया पर वायरल आरोपों का लिया संज्ञान, जांच समिति गठित करने के आदेश

 

देहरादून। बीकेटीसी ने बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान में कथित हेराफेरी के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों का गंभीर संज्ञान लिया है। समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच के लिए जांच समिति गठित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है।

 

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया में जिस कर्मचारी को उनका "निजी सचिव" बताया जा रहा है, वह उनका निजी सचिव नहीं, बल्कि बीकेटीसी का नियमित सरकारी कर्मचारी है, जो पूर्व में भी मंदिर समिति के तीन अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में कार्य कर चुका है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि 2 जुलाई की शाम से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित शिकायत पत्र के आधार पर बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई। उपलब्ध फुटेज में अपेक्षित स्पष्टता नहीं मिल सकी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रकरण से बीकेटीसी अध्यक्ष को अवगत करा दिया गया है।

 

उन्होंने बताया कि अध्यक्ष के निर्देशानुसार संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है तथा मामले की विस्तृत जांच के लिए आंतरिक जांच समिति गठित किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। समिति सभी उपलब्ध साक्ष्यों, तथ्यों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

 

मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता या प्रतिकूल तथ्य सामने आते हैं तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम-1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत दोषियों के विरुद्ध वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

 

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि श्री बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में किसी भी आरोप की विधिवत पुष्टि होने से पहले अपुष्ट और भ्रामक आरोप-प्रत्यारोप से बचना चाहिए तथा धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए धाम की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए।