गढ़वाल की पारंपरिक रामलीला को मिलेगा साहित्यिक और शोधपरक आधार, लोकसंस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण साबित होगी पुस्तक,
रुद्रप्रयाग। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. ममता कुंवर की शोधपरक पुस्तक ‘श्रीरामलीला : संस्कार, त्याग और मर्यादा की अद्भुत गाथा’ का विमोचन किया। गढ़वाल अंचल की पारंपरिक रामलीला पर केंद्रित यह पुस्तक क्षेत्र की समृद्ध लोकनाट्य परंपरा को संरक्षित करने के साथ ही उसे व्यवस्थित साहित्यिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
पुस्तक में गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित रामलीला की चौपाइयों, रागनियों, छंदों और दोहों को मंचन क्रम के अनुसार संकलित किया गया है। इससे रामलीला के मंचन से जुड़े कलाकारों, निर्देशकों और आयोजन समितियों को व्यावहारिक मदद मिलेगी। साथ ही, यह पुस्तक लोकसंस्कृति के अध्येताओं, शोधार्थियों और नई पीढ़ी के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में भी काम करेगी।
गढ़वाल की रामलीला अपनी विशिष्ट गायन शैली, पारंपरिक धुनों, संवाद अदायगी और सामूहिक सहभागिता के लिए विशेष पहचान रखती है। इसकी समृद्ध परंपरा लंबे समय से लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रही है। पुस्तक में इस परंपरा के मौखिक और मंचीय स्वरूप को शोधपरक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है, ताकि रामलीला में प्रयुक्त साहित्यिक एवं सांगीतिक सामग्री को एक व्यवस्थित रूप में संरक्षित किया जा सके।
पुस्तक तैयार करने के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए डॉ. ममता कुंवर ने बताया कि रामलीला में उपयोग होने वाली साहित्यिक और सांगीतिक सामग्री को क्रमबद्ध ढंग से संकलित करना इस प्रयास का प्रमुख उद्देश्य है। इससे पारंपरिक प्रस्तुतियों की मूल विशेषताओं को सहेजने और भावी पीढ़ियों तक इस सांस्कृतिक विरासत को पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, राजेश कुंवर, रणजीत गुसाईं, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अजय सेमवाल, उद्यमी एवं समाजसेवी राजन गोयल, नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी, पुरुषोत्तम डोभाल और संजय चमोली सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

