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मिट्टी के दीये और धूपबत्ती बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहीं 20 महिलाएं,

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जय रुद्रनाथ सीएलएफ जवाड़ी से जुड़ी दरमोला-जवाड़ी की महिलाओं की पहल, दीपावली पर ‘वोकल फॉर लोकल’ को दे रहीं बढ़ावा,

 

रुद्रप्रयाग। दीपावली के पर्व पर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और महिला सशक्तीकरण की दिशा में जय रुद्रनाथ क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) जवाड़ी से जुड़ी महिलाएं सराहनीय पहल कर रही हैं। विकासखंड जखोली के दरमोला-जवाड़ी क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 20 महिलाएं मिट्टी के आकर्षक दीये और धूपबत्ती तैयार कर स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

 

महिलाएं इन दिनों पूरे उत्साह और मेहनत के साथ मिट्टी के दीये बनाने, उन्हें सुखाने, रंगने और आकर्षक रूप देने में जुटी हैं। बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक दीयों के साथ विभिन्न रंगों और डिजाइनों के सजावटी दीये भी तैयार किए जा रहे हैं। वहीं, धूपबत्ती निर्माण के जरिए स्थानीय उत्पादों की श्रृंखला को विस्तार दिया जा रहा है। इस पहल से महिलाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और वे अपने हुनर के बल पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

तैयार उत्पादों की बिक्री स्थानीय बाजारों, मेलों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से की जाएगी। इससे महिलाओं को अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

महिलाओं की यह पहल केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक हस्तकला को संरक्षण देने और स्थानीय स्तर पर तैयार पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को प्रोत्साहित करने का भी माध्यम बन रही है। दीपावली पर मिट्टी के दीयों के उपयोग के माध्यम से महिलाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को धरातल पर उतार रही हैं।

 

मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र रावत ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय संसाधनों और हुनर के आधार पर तैयार किए जा रहे उत्पाद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही स्थानीय बाजारों को भी नई पहचान दे रहे हैं। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और महिलाओं के प्रयासों को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

 

समूह की महिलाओं ने आमजन से अपील की है कि इस दीपावली पर बाजार में उपलब्ध स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित मिट्टी के दीये और धूपबत्ती खरीदकर उनका उत्साहवर्धन करें। इससे न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को भी नई ताकत मिलेगी।