गुलदार के आतंक से सहमे ग्रामीण, खौफ में स्कूली बच्चे, फलासी, गडिल, मलाऊं समेत आधा दर्जन गांवों में बढ़ी गुलदार की सक्रियता, ग्रामीणों ने मांगे तीन शिकारी पिंजरे

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रुद्रप्रयाग। तल्ला नागपुर-चोपता क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में इन दिनों गुलदार की बढ़ती सक्रियता ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। फलासी, गडिल, मलाऊं, भटवाड़ी और बछनी समेत आसपास के गांवों में शाम ढलते ही गुलदार की धमक से लोग दहशत में हैं। सबसे अधिक चिंता स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार के डर से अभिभावक सुबह बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक गुलदार लगातार आबादी के आसपास मंडरा रहा है और आए दिन पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहा है। बीते कुछ दिनों में फलासी ग्राम सभा में गुलदार भैंस, बैल, बकरियों और पालतू कुत्तों को निवाला बना चुका है। मवेशियों के लगातार शिकार से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, आबादी के नजदीक गुलदार की मौजूदगी से ग्रामीणों में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद वन विभाग ने गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में दो ट्रैप कैमरे और दो एनीडर्स लगाए हैं। हालांकि, अभी तक कैमरों में गुलदार की हलचल कैद नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि कैमरों में तस्वीर कैद नहीं होने के बावजूद गुलदार की मौजूदगी रोजाना अलग-अलग गांवों में देखी जा रही है। ऐसे में ग्रामीण विभाग से निगरानी के साथ-साथ गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

फलासी की ग्राम प्रधान हेमा देवी ने वन विभाग की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए प्रभावित गांवों में तत्काल कम से कम तीन शिकारी पिंजरे लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ रहा है और बच्चों तथा ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है। यदि समय रहते गुलदार को पकड़कर आबादी से दूर नहीं किया गया तो किसी भी समय बड़ी जनहानि हो सकती है। ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।

वन दरोगा अगस्त्यमुनि विक्रम भंडारी का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा बताए गए गुलदार की सक्रियता वाले स्थानों पर कैमरे और एनीडर्स लगाए गए हैं। अभी तक गुलदार की गतिविधि कैमरों में कैद नहीं हुई है। पिंजरा लगाने की प्रक्रिया नियमानुसार अपेक्षाकृत लंबी है। ग्रामीणों की मांग और क्षेत्र की स्थिति से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।