रायवाला क्षेत्र में घटनाओं के बाद दहशत में लोग, बच्चों-बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों पर मंडरा रहा खतरा,
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी के प्रमुख कस्बे गुप्तकाशी में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक लोगों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। रायवाला क्षेत्र में आवारा कुत्ते के हमले में दो लोगों के घायल होने के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की संख्या से लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होने लगी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गुप्तकाशी के विभिन्न हिस्सों में आवारा कुत्तों के झुंड घूमते नजर आ रहे हैं। ये कुत्ते अचानक राहगीरों पर हमला कर देते हैं। सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को बना हुआ है। कुत्तों के झुंड को देखकर कई बार वाहन चालक घबरा जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
रायवाला क्षेत्र में दो लोगों को कुत्ते द्वारा काटे जाने की घटना के बाद लोगों में चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
आवारा कुत्तों के झुंड के कारण बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है। अचानक कुत्तों के पीछे दौड़ने या हमला करने की स्थिति में बुजुर्गों और बच्चों के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्षेत्र में आवारा कुत्तों की धरपकड़ और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
एम.एल. पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता मदन रावत ने कहा कि गुप्तकाशी क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय है। संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन को मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना या अप्रिय घटना को होने से पहले रोका जा सके।
सामाजिक कार्यकर्ता और उपहार समिति के अध्यक्ष विपिन सेमवाल ने प्रशासन और संबंधित विभाग से गुप्तकाशी के रायवाला सहित आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित रूप से अभियान चलाकर समस्या पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। स्लोथानीय लोगों का सवाल है कि आखिर किसी बड़ी घटना का इंतजार क्यों? यदि समय रहते आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या राहगीरों की सुरक्षा के साथ-साथ स्कूली बच्चों और स्थानीय नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

