50 हजार घनमीटर कमजोर चट्टान व ढीले पत्थर हटेंगे, केबल नेट और सुरक्षा दीवारों से पहाड़ी को मिलेगा मजबूती
रुद्रप्रयाग। बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोहबगड़ भूस्खलन क्षेत्र के स्थायी समाधान की दिशा में शुक्रवार से महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। सिरोहबगड़ में करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले ट्रीटमेंट कार्य का पूजा-अर्चना के साथ शुभारंभ किया गया। परियोजना को 18 माह में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रुद्रप्रयाग-पौड़ी गढ़वाल की सीमा पर स्थित सिरोहबगड़ भूस्खलन क्षेत्र लंबे समय से यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। पहाड़ी में लगातार हो रहे कटाव के चलते बारिश के दौरान मलबा और पत्थर हाईवे पर गिरते रहते हैं। इसके कारण यातायात बाधित होने के साथ ही चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
एनएच खंड रुद्रप्रयाग के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडेय ने बताया कि परियोजना के तहत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पहाड़ी के ढलान को स्थिर किया जाएगा। पहाड़ी से करीब 50 हजार घनमीटर ढीले पत्थर और कमजोर हिस्से को हटाया जाएगा, जिससे हाईवे पर मलबा और पत्थर गिरने का खतरा कम हो सके।
उन्होंने बताया कि पहाड़ी को मजबूती देने के लिए केबल नेट सहित अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। कमजोर हिस्सों में मजबूत सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया जाएगा। वहीं, जरूरत वाले स्थानों पर कंक्रीट और गहरी नींव वाली दीवारें बनाई जाएंगी। पानी के कटाव से पहाड़ी को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कंक्रीट की विशेष परत भी बिछाई जाएगी।
सिरोहबगड़ क्षेत्र में ट्रीटमेंट कार्य पूरा होने के बाद बरसात के दौरान बार-बार होने वाले भूस्खलन और हाईवे बाधित होने की समस्या से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है। परियोजना को चारधाम यात्रियों के साथ ही स्थानीय जनता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

