देहरादून। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत बुधवार को देहरादून पहुँचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुँचने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद वे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के लिए रवाना हुए, जहाँ उन्होंने भारतीय वन सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों (प्रोबेशनर्स) को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने युवा अधिकारियों से 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत को सर्वोपरि रखते हुए पारिस्थितिक सुरक्षा, वनों के संरक्षण और सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी बनाए रखने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन बुधवार को दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर देहरादून पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट से उपराष्ट्रपति देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को समझने और व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय टीम के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने का संदेश दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईएफएस के ये युवा अधिकारी विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके कंधों पर देश के वनों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने भारतीय वन सेवा को देश की पारिस्थितिक सुरक्षा और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी मानने की जरूरत नहीं है। दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना संभव है। अधिकारियों को संरक्षण, विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच बेहतर संतुलन कायम करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों से जुड़े फैसलों में स्थानीय समुदायों और उनके पारंपरिक ज्ञान को भी महत्व दिया जाना चाहिए। जंगल और वन्यजीव संरक्षण तभी प्रभावी होगा, जब स्थानीय लोगों का विश्वास और सहयोग व्यवस्था के साथ जुड़ा हो। आईएफएस परिवीक्षाधीनों से संवाद के दौरान उपराष्ट्रपति ने व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय टीम वर्क और सामूहिक उत्कृष्टता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक और वन प्रबंधन की चुनौतियां अकेले नहीं, बल्कि टीम भावना के साथ मिलकर हल की जानी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी को गैर-परक्राम्य बताते हुए कहा कि अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और पारदर्शिता से करें। उन्होंने युवा अधिकारियों से अपने करिअर की सफलता को केवल पद या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि वनों की बहाली, वन्यजीवों की सुरक्षा और स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतने के आधार पर मापने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने वन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों से रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा आधारित प्रणालियों का उपयोग क्षेत्रीय अनुभव के साथ जोड़ने को कहा। इससे वन क्षेत्रों की निगरानी, संरक्षण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। उन्होंने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक बदलाव बताया। वर्तमान बैच में करीब 17 प्रतिशत महिला अधिकारी हैं। उन्होंने इसे वन प्रशासन में विविधता और नई ऊर्जा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक सेवा के दौरान ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धांत हमेशा सर्वोपरि रहना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ समाज और देश के व्यापक हित में काम करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन 20 अगस्त को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 2024 बैच के आईएएस अधिकारियों के प्रोफेशनल कोर्स के द्वितीय चरण के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके दो दिवसीय दौरे को उत्तराखंड में युवा प्रशासनिक एवं वन अधिकारियों के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।